बालकाण्ड

अध्याय 71: मैना की चिन्ता, हिमवान का धीरज

5 श्लोक · 71 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

मैना की चिन्ता, हिमवान का धीरज

ऐसा कहकर मुनि ब्रह्मलोक चले गए। अब आगे का चरित सुनो। पति को एकान्त में पाकर मैना बोलीं, हे नाथ, मैं मुनि की बात नहीं समझी। यदि घर, वर और कुल अनुपम हों और कन्या के योग्य हों, तो विवाह कीजिए, नहीं तो कन्या कुँआरी ही रहे, क्योंकि उमा मुझे प्राणों से प्यारी है। यदि गिरिजा के योग्य वर न मिला, तो सब कहेंगे कि पर्वत स्वभाव से ही जड़ है। यही सोचकर ऐसा विवाह कीजिए कि फिर हृदय में जलन न हो। ऐसा कहकर वे आँसू भरे चरणों पर गिर पड़ीं। गिरिराज स्नेह से बोले, चाहे चन्द्रमा में आग प्रकट हो जाए, पर नारद का वचन झूठा नहीं होगा। हे प्रिये, सब चिन्ता छोड़कर श्रीभगवान का स्मरण करो, जिसने पार्वती को रचा है, वही कल्याण करेगा।

71.1

कहि अस कहि ब्रह्म-भवन मुनि गयऊ । आगिल चरित सुनहु जस भयऊ ॥
पतिहि एकान्त पाइ कह मैना । नाथ न मैं समुझे मुनि-बैना ॥

kahi asa kahi brahma-bhavana muni gayaū | āgila carita sunahu jasa bhayaū ||
patihi ekānta pāi kaha mainā | nātha na maiṃ samujhe muni-bainā ||

71.2

जौँ घर बर कुल होइ अनूपा । करिय बिबाह सुता-अनुरूपा ॥
न त कन्या बरु रहउ कुआरी । कन्त उमा मम प्रान-पियारी ॥

jaum̐ ghara bara kula hoi anūpā | kariya bibāha sutā-anurūpā ||
na ta kanyā baru rahau kuārī | kanta umā mama prāna-piyārī ||

71.3

जौँ न मिलिहि बर गिरिजहि जोगू । गिरि जड़ सहज कहिहि सब लोगू ॥
सोइ बिचारि पति करेहु बिबाहू । जेहिं न बहोरि होइ उर दाहू ॥

jaum̐ na milihi bara girijahi jogū | giri jar̤a sahaja kahihi saba logū ||
soi bicāri pati karehu bibāhū | jehiṃ na bahori hoi ura dāhū ||

71.4

अस कहि परी चरन धरि सीसा । बोले सहित सनेह गिरीसा ॥
बरु पावक प्रगटै ससि माहीँ । नारद बचन अन्यथा नाहीं ॥

asa kahi parī carana dhari sīsā | bole sahita saneha girīsā ||
baru pāvaka pragaṭai sasi māhīm̐ | nārada bacana anyathā nāhīṃ ||

दो॰ 71दोहा

प्रिया सोच परिहरहु सब, सुमिरहु श्रीभगवान ।
पारबती निरमयउ जेहिं, सोइ करिहि कल्यान ॥

priyā soca pariharahu saba, sumirahu śrībhagavāna |
pārabatī niramayau jehiṃ, soi karihi kalyāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0