बालकाण्ड

अध्याय 66: हिमवान के घर नारद का आगमन

5 श्लोक · 66 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

हिमवान के घर नारद का आगमन

पर्वत पर सब नदियाँ पवित्र जल बहाने लगीं, पक्षी, मृग और भौंरे सुखी रहने लगे। सब जीवों ने स्वाभाविक बैर छोड़ दिया और सब पर्वत से प्रेम करने लगे। गिरिजा के घर आने से पर्वत ऐसे शोभित हुआ जैसे रामभक्ति पाकर भक्त शोभित होता है। उसके घर नित्य नए मंगल होते और ब्रह्मा आदि उसका यश गाते। नारद ने सब समाचार पाया और कौतुक से हिमाचल के घर पहुँचे। पर्वतराज ने बड़ा आदर किया, चरण धोकर उत्तम आसन दिया। पत्नी सहित मुनि के चरणों में सिर नवाया और चरणोदक सारे भवन में छिड़कवाया। अपने सौभाग्य का बहुत वर्णन करके पुत्री को बुलाकर मुनि के चरणों में डाल दिया और कहा कि आप त्रिकालदर्शी और सर्वज्ञ हैं, हृदय में विचारकर कन्या के गुण दोष बताइए।

66.1

सरिता सब पुनीत जल बहहीँ । खग मृग मधुप सुखी सब रहहीँ ॥
सहज-बयर सब जीवन्ह त्यागा । गिरि पर सकल करहिँ अनुरागा ॥

saritā saba punīta jala bahahīm̐ | khaga mṛga madhupa sukhī saba rahahīm̐ ||
sahaja-bayara saba jīvanha tyāgā | giri para sakala karahim̐ anurāgā ||

66.2

सोह सैल गिरिजा गृह आये । जिमि जन रामभगति के पाये ॥
नित नूतन मङ्गल गृह तासू । ब्रह्मादिक गावहिँ जस जासू ॥

soha saila girijā gṛha āye | jimi jana rāmabhagati ke pāye ||
nita nūtana maṅgala gṛha tāsū | brahmādika gāvahim̐ jasa jāsū ||

66.3

नारद समाचार सब पाये । कौतुकहीं गिरि-गेह सिधाये ॥
सैलराज बड़ आदर कीन्हा । पद पखारि बर आसन दीन्हा ॥

nārada samācāra saba pāye | kautukahīṃ giri-geha sidhāye ||
sailarāja bar̤a ādara kīnhā | pada pakhāri bara āsana dīnhā ||

66.4

नारि सहित मुनि-पद सिर नावा । चरन-सलिल सब भवन सिंचावा ॥
निज सौभाग्य बहुत विधि बरना । सुता बोलि मेली मुनि चरना ॥

nāri sahita muni-pada sira nāvā | carana-salila saba bhavana siṃcāvā ||
nija saubhāgya bahuta vidhi baranā | sutā boli melī muni caranā ||

दो॰ 66दोहा

त्रिकालग्य सर्वग्य तुम्ह, गति सर्वत्र तुम्हारि ।
कहहु सुता के दोष गुन, मुनिबर हृदयँ बिचारि ॥

trikālagya sarvagya tumha, gati sarvatra tumhāri |
kahahu sutā ke doṣa guna, munibara hṛdayam̐ bicāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0