कह मुनि बिहँसि गूढ मृदु बानी । सुता तुम्हारि सकल-गुन-खानी ॥
सुन्दर सहज सुसील सयानी । नाम उमा अम्बिका भवानी ॥
kaha muni biham̐si gūḍha mṛdu bānī | sutā tumhāri sakala-guna-khānī ||
sundara sahaja susīla sayānī | nāma umā ambikā bhavānī ||
5 श्लोक · 67 में से 361
मुनि ने हँसकर गूढ़ और कोमल वाणी में कहा कि तुम्हारी कन्या सब गुणों की खान है। यह स्वभाव से सुन्दर, सुशील और सयानी है, इसके नाम उमा, अम्बिका और भवानी हैं। यह सब लक्षणों से युक्त है, सदा अपने पति की प्यारी रहेगी और इसका सुहाग सदा अचल रहेगा। इससे माता पिता यश पाएँगे। यह सारे जगत में पूजी जाएगी और इसकी सेवा से कुछ भी दुर्लभ न रहेगा। इसका नाम स्मरण करके स्त्रियाँ पतिव्रत रूपी तलवार की धार पर चलेंगी। फिर मुनि बोले, अब इसके दो चार अवगुण सुनो। इसे ऐसा पति मिलेगा जो गुणहीन, मानहीन, माता पिता से रहित, उदासीन और संशयरहित होगा, जटाधारी योगी, निष्काम, नग्न और अमंगल वेश वाला। इसके हाथ में ऐसी ही रेखा पड़ी है।
कह मुनि बिहँसि गूढ मृदु बानी । सुता तुम्हारि सकल-गुन-खानी ॥
सुन्दर सहज सुसील सयानी । नाम उमा अम्बिका भवानी ॥
kaha muni biham̐si gūḍha mṛdu bānī | sutā tumhāri sakala-guna-khānī ||
sundara sahaja susīla sayānī | nāma umā ambikā bhavānī ||
सब लच्छन-सम्पन्न कुमारी । होइहि सन्तत पियहि पियारी ॥
सदा अचल एहि कर अहिवाता । एहि तेँ जस पैहहिं पितु-माता ॥
saba lacchana-sampanna kumārī | hoihi santata piyahi piyārī ||
sadā acala ehi kara ahivātā | ehi tem̐ jasa paihahiṃ pitu-mātā ||
होइहि पूज्य सकल जग माहीं । एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीँ ॥
एहि कर नाम सुमिरि संसारा । तिय चढ़हहिं पतिव्रत असि धारा ॥
hoihi pūjya sakala jaga māhīṃ | ehi sevata kachu durlabha nāhīm̐ ||
ehi kara nāma sumiri saṃsārā | tiya car̤hahahiṃ pativrata asi dhārā ||
सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी । सुनहु जे अब अवगुन दुइ-चारी ॥
अगुन अमान मातु-पितु हीना । उदासीन सब संसय छीना ॥
saila sulacchana sutā tumhārī | sunahu je aba avaguna dui-cārī ||
aguna amāna mātu-pitu hīnā | udāsīna saba saṃsaya chīnā ||
जोगी जटिल अकाम-मन, नगन अमङ्गल-बेष ।
अस स्वामी एहि कहँ मिलिहि, परी हस्त असि रेख ॥
jogī jaṭila akāma-mana, nagana amaṅgala-beṣa |
asa svāmī ehi kaham̐ milihi, parī hasta asi rekha ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0