बालकाण्ड

अध्याय 61: दक्ष के यज्ञ में जाने की अनुमति

5 श्लोक · 61 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

दक्ष के यज्ञ में जाने की अनुमति

किन्नर, नाग, सिद्ध और गन्धर्व अपनी पत्नियों सहित चल पड़े, सब देवता विमान सजाकर दक्ष के यज्ञ को जाने लगे। केवल विष्णु, ब्रह्मा और महेश नहीं गए। सती ने आकाश में जाते हुए सुन्दर विमान देखे और देवांगनाओं का ऐसा मधुर गान सुना कि मुनियों का ध्यान छूट जाए। उन्होंने शिव से पूछा तो शिव ने सब बता दिया। पिता के यज्ञ की बात सुनकर सती कुछ प्रसन्न हुईं और सोचा कि इसी बहाने कुछ दिन वहाँ जाकर रह आऊँ। पति द्वारा त्यागे जाने का दुःख हृदय में भारी था, पर अपना अपराध समझकर वे कुछ न बोलीं। भय, संकोच और प्रेम से भरी वाणी में उन्होंने कहा कि हे कृपानिधान, आपकी आज्ञा हो तो मैं पिता के घर का उत्सव आदर से देख आऊँ।

61.1

किन्नर नाग सिद्ध गन्धर्वा । बधुन्ह समेत चले सुर सर्बा ॥
बिष्नु बिरञ्चि महेस बिहाई । चले सकल सुर जान बनाई ॥

kinnara nāga siddha gandharvā | badhunha sameta cale sura sarbā ||
biṣnu birañci mahesa bihāī | cale sakala sura jāna banāī ||

61.2

सतीं बिलोके ब्योम बिमाना । जात चले सुन्दर विधि नाना ॥
सुर-सुन्दरी करहिँ कल गाना । सुनत स्रवन छूटहिँ मुनि ध्याना ॥

satīṃ biloke byoma bimānā | jāta cale sundara vidhi nānā ||
sura-sundarī karahim̐ kala gānā | sunata sravana chūṭahim̐ muni dhyānā ||

61.3

पूछेउ तब सिवँ कहेउ बखानी । पिता जग्य सुनि कछु हरषानी ॥
जौँ महेस मोहि आयसु देहीं । कछु दिन जाइ रहउँ मिस एहीँ ॥

pūcheu taba sivam̐ kaheu bakhānī | pitā jagya suni kachu haraṣānī ||
jaum̐ mahesa mohi āyasu dehīṃ | kachu dina jāi rahaum̐ misa ehīm̐ ||

61.4

पति-परित्याग हृदय दुख भारी । कहइ न निज अपराध बिचारी ॥
बोली सती मनोहर बानी । भय सङ्कोच प्रेम रस सानी ॥

pati-parityāga hṛdaya dukha bhārī | kahai na nija aparādha bicārī ||
bolī satī manohara bānī | bhaya saṅkoca prema rasa sānī ||

दो॰ 61दोहा

पिता भवन उत्सव परम, जौँ प्रभु आयसु होइ ।
तो मैँ जाउँ कृपायतन, सादर देखन सोइ ॥

pitā bhavana utsava parama, jaum̐ prabhu āyasu hoi |
to maim̐ jāum̐ kṛpāyatana, sādara dekhana soi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0