बालकाण्ड

अध्याय 62: बिना बुलाए न जाने की शिव की सीख

5 श्लोक · 62 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

बिना बुलाए न जाने की शिव की सीख

शिव ने कहा कि तुम्हारी बात अच्छी है, पर इसमें एक अनुचित बात है कि न्योता नहीं भेजा गया। दक्ष ने अपनी सब बेटियाँ बुलाईं, पर हमसे बैर के कारण तुम्हें भुला दिया। ब्रह्मा की सभा में वे हमसे रुष्ट हुए थे और आज भी अपमान करते हैं। हे भवानी, यदि बिना बुलाए जाओगी तो न शील बचेगा, न स्नेह, न मर्यादा। मित्र, स्वामी, पिता और गुरु के घर बिना बुलाए भी जाया जा सकता है, पर जहाँ कोई विरोध मानता हो, वहाँ जाने से कल्याण नहीं होता। शम्भु ने अनेक प्रकार से समझाया, पर होनी के वश सती के मन में ज्ञान न उतरा। बहुत यत्न करके भी जब दक्षकुमारी न रुकीं, तब त्रिपुरारि ने मुख्य गण साथ देकर उन्हें विदा किया।

62.1

कहेहु नीक मोरेहुँ मन भावा । यह अनुचित नहिँ नेवत पठावा ॥
दच्छ सकल निज सुता बोलाई । हमरें बयर तुम्हउ बिसराई ॥

kahehu nīka morehum̐ mana bhāvā | yaha anucita nahim̐ nevata paṭhāvā ||
daccha sakala nija sutā bolāī | hamareṃ bayara tumhau bisarāī ||

62.2

ब्रह्म-सभा हम सन दुख माना । तेहि तेँ अजहुँ करहिं अपमाना ॥
जौँ बिनु बोलें जाहु भवानी । रहइ न सील सनेह न कानी ॥

brahma-sabhā hama sana dukha mānā | tehi tem̐ ajahum̐ karahiṃ apamānā ||
jaum̐ binu boleṃ jāhu bhavānī | rahai na sīla saneha na kānī ||

62.3

जदपि मित्र-प्रभु-पितु-गुरु गेहा । जाइअ बिनु बोलेहुँ न सँदेहा ॥
तदपि बिरोध मान जहँ कोई । तहाँ गये कल्यान न होई ॥

jadapi mitra-prabhu-pitu-guru gehā | jāia binu bolehum̐ na sam̐dehā ||
tadapi birodha māna jaham̐ koī | tahām̐ gaye kalyāna na hoī ||

62.4

भाँति अनेक सम्भु समुझावा । भावी बस न ज्ञान उर आवा ॥
कह प्रभु जाहु जो बिनहिँ बोलाये । नहिँ भलि बात हमारे भाये ॥

bhām̐ti aneka sambhu samujhāvā | bhāvī basa na jñāna ura āvā ||
kaha prabhu jāhu jo binahim̐ bolāye | nahim̐ bhali bāta hamāre bhāye ||

दो॰ 62दोहा

करि देखा हर जतन बहु, रहइ न दच्छकुमारि ।
दिये मुख्य गन सङ्ग तब, बिदा कीन्ह त्रिपुरारि ॥

kari dekhā hara jatana bahu, rahai na dacchakumāri |
diye mukhya gana saṅga taba, bidā kīnha tripurāri ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0