बालकाण्ड

अध्याय 55: दर्शन समाप्त और शिव का प्रश्न

5 श्लोक · 55 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

दर्शन समाप्त और शिव का प्रश्न

जहाँ जहाँ रघुपति दिखे, वहाँ वहाँ शक्तियों सहित सब देवता थे और संसार के सब जीव। देवता अनेक वेशों में प्रभु को पूज रहे थे, पर राम का रूप दूसरा नहीं था, सीता सहित बहुत से रघुपति, पर एक ही वेश। वही रघुबर, वही लक्ष्मण और सीता। यह देखकर सती अत्यन्त भयभीत हुईं। हृदय काँपा, शरीर की सुध न रही, और वे आँखें मूँदकर मार्ग में बैठ गईं। आँखें खोलीं तो वहाँ कुछ न दिखा। बार बार राम के चरणों में सिर नवाकर वे वहाँ चलीं जहाँ गिरीश थे। दोहा कहता है कि महेश ने हँसकर कुशल पूछी और कहा कि तुमने किस प्रकार परीक्षा ली, सब सच सच कहो।

55.1

देखे जहँ तहँ रघुपति जेते । सक्तिन्ह सहित सकल सुर तेते ॥
जीव चराचर जे संसारा । देखे सकल अनेक प्रकारा ॥

dekhe jaham̐ taham̐ raghupati jete | saktinha sahita sakala sura tete ||
jīva carācara je saṃsārā | dekhe sakala aneka prakārā ||

55.2

पूजहिं प्रभुहि देव बहु बेखा । राम-रूप दूसर नहिँ देखा ॥
अवलोके रघुपति बहुतेरे । सीता सहित न बेष घनेरे ॥

pūjahiṃ prabhuhi deva bahu bekhā | rāma-rūpa dūsara nahim̐ dekhā ||
avaloke raghupati bahutere | sītā sahita na beṣa ghanere ||

55.3

सोइ रघुबर सोइ लछिमन सीता । देखि सती अति भई सभीता ॥
हृदय कम्प तन सुधि कछु नाहीं । नयन मूँदि बैठीं मग माहीँ ॥

soi raghubara soi lachimana sītā | dekhi satī ati bhaī sabhītā ||
hṛdaya kampa tana sudhi kachu nāhīṃ | nayana mūm̐di baiṭhīṃ maga māhīm̐ ||

55.4

बहुरि बिलोकेउ नयन उघारी । कछु न दीख तहँ दच्छकुमारी ॥
पुनि पुनि नाइ राम-पद सीसा । चलीँ तहाँ जहँ रहे गिरीसा ॥

bahuri bilokeu nayana ughārī | kachu na dīkha taham̐ dacchakumārī ||
puni puni nāi rāma-pada sīsā | calīm̐ tahām̐ jaham̐ rahe girīsā ||

दो॰ 55दोहा

गई समीप महेस तब, हँसि पूछी कुसलात ।
लीन्हि परीछा कवन विधि, कहहु सत्य सब बात ॥

gaī samīpa mahesa taba, ham̐si pūchī kusalāta |
līnhi parīchā kavana vidhi, kahahu satya saba bāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0