बालकाण्ड

अध्याय 54: सती ने अनगिनत राम और देवता देखे

5 श्लोक · 54 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

सती ने अनगिनत राम और देवता देखे

सती सोचती हैं कि मैंने शंकर का कहा न माना और अपना अज्ञान राम पर आरोपित किया, अब क्या उत्तर दूँगी? हृदय में भयानक जलन उठी। राम ने उनका दुःख जानकर अपना कुछ प्रभाव प्रकट किया। मार्ग में सती ने आगे राम को सीता और भाई सहित देखा, फिर मुड़कर पीछे भी वही देखे। जहाँ देखतीं, वहाँ प्रभु विराजमान थे और सिद्ध तथा मुनि सेवा कर रहे थे। उन्होंने अनेक शिव, ब्रह्मा और विष्णु देखे, एक से एक अमित प्रभाव वाले, जो प्रभु के चरणों की वन्दना कर रहे थे, और सब देवता अनेक वेशों में दिखे। दोहा कहता है कि उन्होंने अनगिनत अनुपम सती, ब्रह्माणी और लक्ष्मी देखीं, हर एक अपने देवता के अनुरूप रूप में।

54.1

मैं सङ्कर कर कहा न माना । निज अज्ञान राम पर आना ॥
जाइ उतर अब देहउँ काहा । उर उपजा अति दारुन-दाहा ॥

maiṃ saṅkara kara kahā na mānā | nija ajñāna rāma para ānā ||
jāi utara aba dehaum̐ kāhā | ura upajā ati dāruna-dāhā ||

54.2

जाना राम सतीं दुख पावा । निज प्रभाउ कछु प्रगटि जनावा ॥
सतीं दीख कौतुक मग जाता । आगें राम सहित श्री भ्राता ॥

jānā rāma satīṃ dukha pāvā | nija prabhāu kachu pragaṭi janāvā ||
satīṃ dīkha kautuka maga jātā | āgeṃ rāma sahita śrī bhrātā ||

54.3

फिरि चितवा पाछें प्रभु देखा । सहित बन्धु सिय सुन्दर बेखा ॥
जहँ चितवहिँ तहँ प्रभु आसीना । सेवहिँ सिद्ध मुनीस प्रबीना ॥

phiri citavā pācheṃ prabhu dekhā | sahita bandhu siya sundara bekhā ||
jaham̐ citavahim̐ taham̐ prabhu āsīnā | sevahim̐ siddha munīsa prabīnā ||

54.4

देखे सिव बिधि बिष्नु अनेका । अमित प्रभाउ एक तेँ एका ॥
बन्दत चरन करत प्रभु सेवा । बिबिध बेष देखे सब देवा ॥

dekhe siva bidhi biṣnu anekā | amita prabhāu eka tem̐ ekā ||
bandata carana karata prabhu sevā | bibidha beṣa dekhe saba devā ||

दो॰ 54दोहा

सती बिधात्री इन्दिरा, देखीं अमित अनूप ।
जेहिं जेहिं बेष अज़ादि सुर, तेहि तेहि तनु अनुरूप ॥

satī bidhātrī indirā, dekhīṃ amita anūpa |
jehiṃ jehiṃ beṣa azādi sura, tehi tehi tanu anurūpa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0