लछिमन दीख उमाकृत बेषा चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा ॥
कहि न सकत कछु अति गम्भीरा । प्रभु प्रभाउ जानत मतिधीरा ॥
lachimana dīkha umākṛta beṣā cakita bhae bhrama hṛdayam̐ biseṣā ||
kahi na sakata kachu ati gambhīrā | prabhu prabhāu jānata matidhīrā ||
5 श्लोक · 53 में से 361
लक्ष्मण ने उमा का बनाया वेश देखा तो चकित हुए, पर गम्भीर और प्रभु का प्रभाव जानने वाले होने से कुछ न बोले। सबके अन्तर्यामी देवस्वामी ने सती का कपट जान लिया। वे वही सर्वज्ञ भगवान राम हैं, जिनके स्मरण से अज्ञान मिटता है। फिर भी सती ने उनसे छिपाव करना चाहा। अपनी माया के बल को मन में सराहकर राम मुस्कुराए। प्रभु ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया और पिता सहित अपना नाम बताया, फिर पूछा कि वृषकेतु कहाँ हैं, आप वन में अकेली क्यों फिर रही हैं? दोहा कहता है कि राम के कोमल और गूढ़ वचन सुनकर सती को बड़ा संकोच हुआ, और वे डरी हुई, भारी चिन्ता लिए महेश के पास चलीं।
लछिमन दीख उमाकृत बेषा चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा ॥
कहि न सकत कछु अति गम्भीरा । प्रभु प्रभाउ जानत मतिधीरा ॥
lachimana dīkha umākṛta beṣā cakita bhae bhrama hṛdayam̐ biseṣā ||
kahi na sakata kachu ati gambhīrā | prabhu prabhāu jānata matidhīrā ||
सती कपट जानेउ सुर-स्वामी । सबदरसी सबअन्तर-जामी ॥
सुमिरत जाहि मिटइ अज्ञाना । सोइ सरबज्ञ राम भगवाना ॥
satī kapaṭa jāneu sura-svāmī | sabadarasī sabaantara-jāmī ||
sumirata jāhi miṭai ajñānā | soi sarabajña rāma bhagavānā ||
सती कीन्ह चह तहउँ दुराऊ । देखहु नारि-सुभाउ-प्रभाऊ ॥
निज-माया-बल हृदयँ बखानी । बोले बिहँसि राम मृदु-बानी ॥
satī kīnha caha tahaum̐ durāū | dekhahu nāri-subhāu-prabhāū ||
nija-māyā-bala hṛdayam̐ bakhānī | bole biham̐si rāma mṛdu-bānī ||
जोरि पानि प्रभु कीन्ह प्रनामू । पिता समेत लीन्ह निज नामू ॥
कहेउ बहोरि कहाँ बृषकेतू । बिपिन अकेलि फिरहु केहि हेतू ॥
jori pāni prabhu kīnha pranāmū | pitā sameta līnha nija nāmū ||
kaheu bahori kahām̐ bṛṣaketū | bipina akeli phirahu kehi hetū ||
राम-बचन-मृदु गूढ़ सुनि, उपजा अति सङ्कोच ।
सती सभीत महेस पहिँ, चलीँ हृदयँ बड़ सोच ॥
rāma-bacana-mṛdu gūr̤ha suni, upajā ati saṅkoca |
satī sabhīta mahesa pahim̐, calīm̐ hṛdayam̐ bar̤a soca ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0