एक बार त्रेता जुग माहीं । सम्भु गये कुम्भज रिषि पाहीं ॥
सङ्ग सती जगजननि भवानी । पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी ॥
eka bāra tretā juga māhīṃ | sambhu gaye kumbhaja riṣi pāhīṃ ||
saṅga satī jagajanani bhavānī | pūje riṣi akhilesvara jānī ||
6 श्लोक · 48 में से 361
एक बार त्रेतायुग में शम्भु सती के साथ ऋषि अगस्त्य के पास गए, जिन्होंने उन्हें अखिलेश्वर जानकर पूजा। मुनि ने रामकथा कही और महेश ने सुख से सुनी। हरिभक्ति के विषय में पूछे जाने पर शम्भु ने उसे समझाया। कुछ दिन बाद गिरिनाथ दक्षकुमारी के साथ घर को चले। उसी समय पृथ्वी का भार उतारने के लिए हरि ने रघुवंश में अवतार लिया था और पिता के वचन से राज्य छोड़कर दण्डक वन में विचर रहे थे। सोरठों में शिव सोचते हैं कि दर्शन कैसे हो, क्योंकि प्रभु गुप्त रूप में अवतरे हैं और खुलकर जाने से सब जान जाएँगे। शंकर के हृदय में हलचल है, सती भेद नहीं जानतीं, मन डरता है पर नेत्र दर्शन के लोभी हैं।
एक बार त्रेता जुग माहीं । सम्भु गये कुम्भज रिषि पाहीं ॥
सङ्ग सती जगजननि भवानी । पूजे रिषि अखिलेस्वर जानी ॥
eka bāra tretā juga māhīṃ | sambhu gaye kumbhaja riṣi pāhīṃ ||
saṅga satī jagajanani bhavānī | pūje riṣi akhilesvara jānī ||
रामकथा मुनिबर्ज बखानी । सुनी महेस परम सुख मानी ॥
रिषि पूछी हरिभगति सुहाई । कही सम्भु अधिकारी पाई ॥
rāmakathā munibarja bakhānī | sunī mahesa parama sukha mānī ||
riṣi pūchī haribhagati suhāī | kahī sambhu adhikārī pāī ||
कहत सुनत रघुपति-गुन-गाथा । कछु दिन तहाँ रहे गिरिनाथा ॥
मुनि सन बिदा माँगि त्रिपुरारी । चले भवन सँग दच्छकुमारी ॥
kahata sunata raghupati-guna-gāthā | kachu dina tahām̐ rahe girināthā ||
muni sana bidā mām̐gi tripurārī | cale bhavana sam̐ga dacchakumārī ||
तेहि अवसर भञ्जन महिभारा । हरि रघुबंस लीन्ह अवतारा ॥
पिता बचन तजि राज उदासी । दंडक बन बिचरत अबिनासी ॥
tehi avasara bhañjana mahibhārā | hari raghubaṃsa līnha avatārā ||
pitā bacana taji rāja udāsī | daṃḍaka bana bicarata abināsī ||
ह्दयँ विचारत जात हर, केहि बिधि दरसन होइ ।
गुपुत-रूप अवतरेउ प्रभु, गये जान सब कोई ॥
hdayam̐ vicārata jāta hara, kehi bidhi darasana hoi |
guputa-rūpa avatareu prabhu, gaye jāna saba koī ||
सङ्कर उर अति छोभु, सती न जानइ मरम सोइ ।
तुलसी दरसन लोभ, मन डर लोचन लालची ॥
saṅkara ura ati chobhu, satī na jānai marama soi |
tulasī darasana lobha, mana ḍara locana lālacī ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0