आरति बिनय दीनता मोरी । लघुता ललित सुबारि न खोरी ॥
अदभुत सलिल सुनत गुनकारी । आस पिआस मनोमल-हारी ॥
ārati binaya dīnatā morī | laghutā lalita subāri na khorī ||
adabhuta salila sunata gunakārī | āsa piāsa manomala-hārī ||
6 श्लोक · 43 में से 361
कवि की आर्ति और दीनता इस जल का हल्कापन है, दोष नहीं। यह सुनने मात्र से गुण करता है, आशा की प्यास बुझाता है और मन धोता है। यह राम के प्रेम को पुष्ट करता है, कलि के पाप हरता है, संसार की थकान सोखता है और पाप तथा दरिद्रता मिटाता है। यह काम, क्रोध और मोह का नाश करके विवेक और वैराग्य बढ़ाता है। जिन्होंने इस जल से मन नहीं धोया, वे कलिकाल के ठगे कायर हैं, जो प्यासे हिरन की तरह मृगजल के पीछे भटकेंगे। दोहे कहते हैं कि इन गुणों में मन को नहलाकर, भवानी और शंकर का स्मरण करके, कवि अब दो श्रेष्ठ मुनियों के मिलन का संवाद कहते हैं।
आरति बिनय दीनता मोरी । लघुता ललित सुबारि न खोरी ॥
अदभुत सलिल सुनत गुनकारी । आस पिआस मनोमल-हारी ॥
ārati binaya dīnatā morī | laghutā lalita subāri na khorī ||
adabhuta salila sunata gunakārī | āsa piāsa manomala-hārī ||
राम सुप्रेमहि पोषत पानी । हरत सकल कलि-कलुष गलानी ॥
भव स्रम सोषक तोषक तोषा । समन दुरित दुख दारिद दोषा ॥
rāma supremahi poṣata pānī | harata sakala kali-kaluṣa galānī ||
bhava srama soṣaka toṣaka toṣā | samana durita dukha dārida doṣā ||
काम कोह मद मोह नसावन । बिमल बिबेक बिराग बढ़ावन ॥
सादर मज्जन पान किये तेँ । मिटिहि पाप परिताप हिये तेँ ॥
kāma koha mada moha nasāvana | bimala bibeka birāga bar̤hāvana ||
sādara majjana pāna kiye tem̐ | miṭihi pāpa paritāpa hiye tem̐ ||
जिन्ह एहि बारि न मानस धोये । ते कायर कलिकाल बिगोये ॥
तृषित निरखि रबि-कर-भव-बारी । फिरिहहिँ मृग जिमि जीव दुखारी ॥
jinha ehi bāri na mānasa dhoye | te kāyara kalikāla bigoye ||
tṛṣita nirakhi rabi-kara-bhava-bārī | phirihahim̐ mṛga jimi jīva dukhārī ||
मति अनुहारि सुबारि गुन, गनि मन अन्हवाइ ।
सुमिरि भवानी-सङ्करहि, कह कबि कथा सुहाइ ॥
mati anuhāri subāri guna, gani mana anhavāi |
sumiri bhavānī-saṅkarahi, kaha kabi kathā suhāi ||
अब रघुपति-पद-पङ्करुह, हियँ धरि पाइ प्रसाद ।
कहउँ जुगल मुनिबर्ज कर, मिलन सुभग सम्बाद ॥
aba raghupati-pada-paṅkaruha, hiyam̐ dhari pāi prasāda |
kahaum̐ jugala munibarja kara, milana subhaga sambāda ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0