बालकाण्ड

अध्याय 42: छहों ऋतुओं में कीर्ति की नदी

5 श्लोक · 42 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

छहों ऋतुओं में कीर्ति की नदी

कीर्ति की नदी छहों ऋतुओं में सुन्दर है। हिमालय की पुत्री से शिव का विवाह हेमन्त है, प्रभु का जन्मोत्सव शिशिर, और राम का विवाह समाज वसन्त। राम का वनगमन असह्य ग्रीष्म है, और मार्ग की कथाएँ उसकी लू। निशाचरों से युद्ध वर्षा है, जो देवकुल रूपी धान के लिए मंगलकारी है। रामराज्य का सुख और विनय उजली शरद है। सतियों की शिरोमणि सीता की गाथा नदी का निर्मल जल है, और भरत का स्वभाव उसकी सदा एक सी शीतलता। दोहा कहता है कि चारों भाइयों का देखना, बोलना, मिलना, प्रेम और हँसी इस जल की मिठास और सुगन्ध है।

42.1

कीरति सरित छहूँ रितु रूरी । समय सुहावनि पावनि भूरी ॥
हिम हिमसैल-सुता सिव ब्याहू । सिसिर सुखद प्रभु-जनम-उछाहू ॥

kīrati sarita chahūm̐ ritu rūrī | samaya suhāvani pāvani bhūrī ||
hima himasaila-sutā siva byāhū | sisira sukhada prabhu-janama-uchāhū ||

42.2

बरनब राम विवाह समाजू । सो मुद-मङ्गल मय रितुराजू ॥
ग्रीषम दुसह राम-बन-गवनू । पन्थ-कथा खर-आतप-पवनू ॥

baranaba rāma vivāha samājū | so muda-maṅgala maya riturājū ||
grīṣama dusaha rāma-bana-gavanū | pantha-kathā khara-ātapa-pavanū ||

42.3

बरषा घोर निसाचर रारी । सुर-कुल-सालि सुमङ्गल-कारी ॥
राम-राज सुख बिनय बड़ाई । बिसद सुखद सोइ सरद सुहाई ॥

baraṣā ghora nisācara rārī | sura-kula-sāli sumaṅgala-kārī ||
rāma-rāja sukha binaya bar̤āī | bisada sukhada soi sarada suhāī ||

42.4

सती-सिरोमनि सिय-गुन-गाथा । सोइ गुन अमल अनूपम पाथा ॥
भरत सुभाउ सुसीतलताई । सदा एकरस बरनि न जाई ॥

satī-siromani siya-guna-gāthā | soi guna amala anūpama pāthā ||
bharata subhāu susītalatāī | sadā ekarasa barani na jāī ||

दो॰ 42दोहा

अवलोकनि बोलनि मिलनि, प्रीति परसपर हास ।
भायप भलि चहुँ बन्धु की, जल माधुरी सुबास ॥

avalokani bolani milani, prīti parasapara hāsa |
bhāyapa bhali cahum̐ bandhu kī, jala mādhurī subāsa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0