बालकाण्ड

अध्याय 40: भक्ति का संगम और कथा के प्रसंग

5 श्लोक · 40 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

भक्ति का संगम और कथा के प्रसंग

सुन्दर कीर्ति की सरयू रामभक्ति रूपी गंगा में मिली, और भाई सहित राम के युद्ध का पवित्र यश महानद सोन बनकर उनसे मिला। दोनों के बीच ज्ञान वैराग्य सहित भक्ति की धारा है। तीनों तापों को डराने वाली यह त्रिवेणी राम के स्वरूप रूपी समुद्र की ओर चली है और श्रोताओं के मन पवित्र करेगी। कथा के विचित्र प्रसंग किनारों के वन और बाग हैं। उमा और महेश के विवाह के बाराती अनगिनत जलचर हैं। रघुबर के जन्म का आनन्द भँवरें और लहरें हैं। दोहा कहता है कि चारों भाइयों के बालचरित रंग बिरंगे कमल हैं, और राजा, रानियों और परिजनों के पुण्य भौंरे और जलपक्षी।

40.1

रामभगति सुरसरितहि जाई । मिली सुकीरति सरजु सुहाई ॥
सानुज राम समर जस पावन । मिलेउ महानद सोन सुहावन ॥

rāmabhagati surasaritahi jāī | milī sukīrati saraju suhāī ||
sānuja rāma samara jasa pāvana | mileu mahānada sona suhāvana ||

40.2

जुग बिच भगति देव धुनि धारा । सोहति सहित सुबिरति बिचारा ॥
त्रिविधि ताप त्रासक तिमुहानी । राम सरूप सिन्धु समुहानी ॥

juga bica bhagati deva dhuni dhārā | sohati sahita subirati bicārā ||
trividhi tāpa trāsaka timuhānī | rāma sarūpa sindhu samuhānī ||

40.3

मानस-मूल मिली सुरसरिही । सुनत सुजन-मन पावन करिही ॥
बिच बिच कथा विचित्र बिभागा । जनु सरि तीर तीर बन बागा ॥

mānasa-mūla milī surasarihī | sunata sujana-mana pāvana karihī ||
bica bica kathā vicitra bibhāgā | janu sari tīra tīra bana bāgā ||

40.4

उमा-महेस-बिबाह बराती । ते जलचर अगनित बहु भाँती ॥
रघुबर-जनम अनन्द-बधाई । भँवर तरङ्ग मनोहरताई ॥

umā-mahesa-bibāha barātī | te jalacara aganita bahu bhām̐tī ||
raghubara-janama ananda-badhāī | bham̐vara taraṅga manoharatāī ||

दो॰ 40दोहा

बालचरित चहुँ बन्धु के, बनज बिपुल बहु रङ्ग ।
नृप-रानी-परिजन सुकृत, मधुकर बारि बिहङ्ग ॥

bālacarita cahum̐ bandhu ke, banaja bipula bahu raṅga |
nṛpa-rānī-parijana sukṛta, madhukara bāri bihaṅga ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0