जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई । जातहिं नींद जुड़ाई होई ॥
जड़ता जाड़ विषम उर लागा । गएहुँ न मज्जन पाव अभागा ॥
jauṃ kari kaṣṭa jāi puni koī | jātahiṃ nīṃda jur̤āī hoī ||
jar̤atā jār̤a viṣama ura lāgā | gaehum̐ na majjana pāva abhāgā ||
8 श्लोक · 39 में से 361
यदि कोई कष्ट उठाकर पहुँच भी जाए, तो नींद रूपी जूड़ी उसे जकड़ लेती है और वह नहा नहीं पाता। वह अभिमान सहित लौटकर सरोवर की निन्दा करता है। जिस पर राम कृपा से देखते हैं, उसे कोई विघ्न नहीं व्यापता। वह आदर से नहाता है और तीनों ताप उसे नहीं जलाते। जो यहाँ नहाना चाहे, वह मन लगाकर सत्संग करे। इस मानस को हृदय के नेत्रों से देखकर कवि की बुद्धि उसमें डूबकर निर्मल हुई और प्रेम उमड़ पड़ा। राम के यश से भरी कविता रूपी नदी बह चली। वही सरयू है, जिसके दो किनारे लोकमत और वेदमत हैं। दोहा कहता है कि श्रोता किनारे के गाँव और नगर हैं, और सन्त सभा अयोध्या।
जौं करि कष्ट जाइ पुनि कोई । जातहिं नींद जुड़ाई होई ॥
जड़ता जाड़ विषम उर लागा । गएहुँ न मज्जन पाव अभागा ॥
jauṃ kari kaṣṭa jāi puni koī | jātahiṃ nīṃda jur̤āī hoī ||
jar̤atā jār̤a viṣama ura lāgā | gaehum̐ na majjana pāva abhāgā ||
करि न जाइ सर मज्जन पाना । फिरि आवइ समेत अभिमाना ॥
जौँ बहोरि कोउ पूछन आवा । सर निन्दा करि ताहि बुझावा ॥
kari na jāi sara majjana pānā | phiri āvai sameta abhimānā ||
jaum̐ bahori kou pūchana āvā | sara nindā kari tāhi bujhāvā ||
सकल विघ्न ब्यापहिँ नहिँ तेही । राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही ॥
सोइ सादर सर मज्जन सर करई । महाघोर त्रय ताप न जरई ॥
sakala vighna byāpahim̐ nahim̐ tehī | rāma sukṛpām̐ bilokahiṃ jehī ||
soi sādara sara majjana sara karaī | mahāghora traya tāpa na jaraī ||
ते नर यह सर तजहिँ न काऊ । जिन्ह के राम चरन भल भाऊ ॥
जो नहाइ चह एहिं सर भाई । सो सतसङ्ग करउ मन लाई ॥
te nara yaha sara tajahim̐ na kāū | jinha ke rāma carana bhala bhāū ||
jo nahāi caha ehiṃ sara bhāī | so satasaṅga karau mana lāī ||
अस मानस मानस चष चाही । भइ कबि बुद्धि बिमल अवगाही ॥
भयउ हृदयँ आनन्द उछाहू । उमगेउ प्रेम प्रमोद प्रबाहू ॥
asa mānasa mānasa caṣa cāhī | bhai kabi buddhi bimala avagāhī ||
bhayau hṛdayam̐ ānanda uchāhū | umageu prema pramoda prabāhū ||
चली सुभग कबिता सरिता सी । राम बिमल जस जल भरिता सो ॥
सरजू नाम सुमङ्गल मूला । लोक बेद मत मञ्जुल कूला ॥
calī subhaga kabitā saritā sī | rāma bimala jasa jala bharitā so ||
sarajū nāma sumaṅgala mūlā | loka beda mata mañjula kūlā ||
नदी पुनीत सुमानस नन्दिनि । कलिमल तृन तरु मूल निकन्दिनि ॥
nadī punīta sumānasa nandini | kalimala tṛna taru mūla nikandini ||
स्रोता त्रिविधि समाज पुर, ग्राम नगर दुहुँ कूल ।
सन्त सभा अनुपम अवध, सकल सुमङ्गल मूल ॥
srotā trividhi samāja pura, grāma nagara duhum̐ kūla |
santa sabhā anupama avadha, sakala sumaṅgala mūla ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0