बालकाण्ड

अध्याय 360: कंगन खुले, विश्वामित्र की विदाई

6 श्लोक · 360 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

कंगन खुले, विश्वामित्र की विदाई

शुभ दिन देखकर विवाह के कंगन खोले जाते हैं और बहुत आनंद होता है। देवता अवध में जन्म माँगते हैं। विश्वामित्र रोज जाना चाहते हैं, पर श्रीराम की प्रेमभरी विनती से रुक जाते हैं। अंत में विदा माँगने पर राजा पुत्रों सहित आगे खड़े होकर कहते हैं, हे नाथ, यह सारी संपदा आपकी है, मैं पुत्रों और स्त्रियों सहित आपका सेवक हूँ। बालकों पर सदा कृपा रखिए और मुझे दर्शन देते रहिए। फिर वे पुत्रों और रानियों सहित चरणों में गिर पड़ते हैं, मुख से वाणी नहीं निकलती। मुनि आशीर्वाद देकर चलते हैं। भाइयों सहित श्रीराम पहुँचाने जाते हैं और आज्ञा पाकर लौटते हैं। गाधिकुल के चंद्र मन ही मन सराहते हुए प्रसन्न होकर जाते हैं।

360.1

सुदिन सोधि कल कङ्कन छौरे । मङ्गल मोद बिनोद न थोरे ॥
नित नव सुख सुर देखि सिहाहीं । अवध जनम जाचहिँ बिधि पाहीं ॥

sudina sodhi kala kaṅkana chaure | maṅgala moda binoda na thore ||
nita nava sukha sura dekhi sihāhīṃ | avadha janama jācahim̐ bidhi pāhīṃ ||

360.2

बिस्वामित्र चलन नित चहहीँ । राम-सप्रेम-विनय-बस रहहीँ ॥
दिन दिन सयगुन भूपति भाऊ । देखि सराह महा-मुनि-राज ॥

bisvāmitra calana nita cahahīm̐ | rāma-saprema-vinaya-basa rahahīm̐ ||
dina dina sayaguna bhūpati bhāū | dekhi sarāha mahā-muni-rāja ||

360.3

माँगत बिदा राउ अनुरागे । सुतन्ह समेत ठाढ़ भे आगे ॥
नाथ सकल सम्पदा तुम्हारी । मैं सेवक समेत सुत नारी ॥

mām̐gata bidā rāu anurāge | sutanha sameta ṭhār̤ha bhe āge ||
nātha sakala sampadā tumhārī | maiṃ sevaka sameta suta nārī ||

360.4

करब सदा लरिकनः पर छोहू । दरसन देत रहब मुनि मोहू ॥
अस कहि राउ सहित सुत रानी । परेउ चरन मुख आव न बानी ॥

karaba sadā larikanaḥ para chohū | darasana deta rahaba muni mohū ||
asa kahi rāu sahita suta rānī | pareu carana mukha āva na bānī ||

360.5

दीन्हि असीस बिप्र बहु भाँती । चले न प्रीति रीति-कहि जाती ॥
राम सप्रेम सङ्ग सब भाई । आयसु पाई फिरे पहुँचाई ॥

dīnhi asīsa bipra bahu bhām̐tī | cale na prīti rīti-kahi jātī ||
rāma saprema saṅga saba bhāī | āyasu pāī phire pahum̐cāī ||

दो॰ 360दोहा

राम रूपु भूपति भगति, ब्याहु उछाहु अनंदु ।
जात सराहत मनहिं मन, मुदित गाधि-कुल-चन्द ॥

rāma rūpu bhūpati bhagati, byāhu uchāhu anaṃdu |
jāta sarāhata manahiṃ mana, mudita gādhi-kula-canda ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0