बालकाण्ड

अध्याय 359: वसिष्ठ ने विश्वामित्र की करनी कही

5 श्लोक · 359 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

वसिष्ठ ने विश्वामित्र की करनी कही

राजा पुत्रों को हृदय से लगा लेते हैं और आज्ञा पाकर वे प्रसन्न होकर बैठते हैं। श्रीराम को देखकर सभा शीतल हो जाती है। फिर वसिष्ठ और विश्वामित्र आते हैं और सुंदर आसनों पर बैठाए जाते हैं। पुत्रों सहित राजा पूजन करके चरण छूते हैं,। वसिष्ठ धर्म और इतिहास की कथाएँ कहते हैं और रनिवास सहित राजा सुनते हैं। फिर वे प्रसन्न होकर गाधिपुत्र की वह करनी विस्तार से कहते हैं। वामदेव कहते हैं कि यह सब सच है, यह कीर्ति तीनों लोकों में फैली है। सब आनंदित होते हैं, श्रीराम और लक्ष्मण सबसे अधिक। इस प्रकार उत्सव में दिन बीतते हैं और अवध का आनंद बढ़ता ही जाता है।

359.1

भूप विलोकि लिये उर लाई । बैठे हरषि रजायसु पाई ॥
देखि राम सब सभा जुड़ानी । लोचन लाभ अवधि अनुमानी ॥

bhūpa viloki liye ura lāī | baiṭhe haraṣi rajāyasu pāī ||
dekhi rāma saba sabhā jur̤ānī | locana lābha avadhi anumānī ||

359.2

पुनि बसिष्ठ मुनि कौसिक आये । सुभग आसनन्हि मुनि बैठाये ॥
सुतन्ह समेत पूजि पग लागे । निरखि राम दोउ गुरु अनुरागे ॥

puni basiṣṭha muni kausika āye | subhaga āsananhi muni baiṭhāye ||
sutanha sameta pūji paga lāge | nirakhi rāma dou guru anurāge ||

359.3

कहहिँ बसिष्ठ धरम इतिहासा । सुनहिँ महीस सहित रनिवासा ॥
मुनि मन अगम गाधि सुत करनी । मुदित बसिष्ठ बिपुल बिधि करनी ॥

kahahim̐ basiṣṭha dharama itihāsā | sunahim̐ mahīsa sahita ranivāsā ||
muni mana agama gādhi suta karanī | mudita basiṣṭha bipula bidhi karanī ||

359.4

बोले बामदेउ सब साँची । कीरति कलित लोक तिहुँ माची ॥
सुनि आनन्द भयउ सब काहू । राम-लखन-उर अधिक उछाहू ॥

bole bāmadeu saba sām̐cī | kīrati kalita loka tihum̐ mācī ||
suni ānanda bhayau saba kāhū | rāma-lakhana-ura adhika uchāhū ||

दो॰ 359दोहा

मङ्गल मोद उछाह नित, जाहिँ दिवस एहि भाँति ।
उमगी अवध अनन्द भरि, अधिक अधिक अधिकाति ॥

maṅgala moda uchāha nita, jāhim̐ divasa ehi bhām̐ti |
umagī avadha ananda bhari, adhika adhika adhikāti ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0