नीदउँ बदन सोह सुठि लोना । मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना ॥
घर घर करहिं जागरन नारीं । देहिँ परसपर मङ्गल गारीं ॥
nīdaum̐ badana soha suṭhi lonā | manahum̐ sām̐jha sarasīruha sonā ||
ghara ghara karahiṃ jāgarana nārīṃ | dehim̐ parasapara maṅgala gārīṃ ||
5 श्लोक · 358 में से 361
नींद में भी श्रीराम का मुख ऐसा सलोना लगता है मानो संध्या के समय लाल कमल हो। घर घर स्त्रियाँ जागरण करती हैं और आपस में मंगल गारियाँ गाती हैं। सासें सुंदर बहुओं को लेकर ऐसे सोती हैं जैसे सर्प अपने सिर की मणि को हृदय में छिपा लेते हैं। पवित्र प्रातःकाल में प्रभु जागते हैं और मुर्गे बोलने लगते हैं। भाट गुण गाते हैं और पुरवासी द्वार पर जुहार करने आते हैं। ब्राह्मण, देवता, गुरु, पिता और माताओं को प्रणाम करके चारों भाई आशीर्वाद पाकर प्रसन्न होते हैं, और माताएँ आदर से उनके मुख निहारती हैं। वे राजा के साथ द्वार पर आते हैं, पवित्र नदी में स्नान करके प्रातःकर्म करते हैं, और फिर चारों भाई पिता के पास आते हैं।
नीदउँ बदन सोह सुठि लोना । मनहुँ साँझ सरसीरुह सोना ॥
घर घर करहिं जागरन नारीं । देहिँ परसपर मङ्गल गारीं ॥
nīdaum̐ badana soha suṭhi lonā | manahum̐ sām̐jha sarasīruha sonā ||
ghara ghara karahiṃ jāgarana nārīṃ | dehim̐ parasapara maṅgala gārīṃ ||
पुरी बिराजति राजति रजनी । रानीं कहहिँ बिलोकहु सजनी ॥
सुन्दर बधुन्ह सासु लेइ सोई । फनिकन्ह जनु सिर-मनि उर गोई ॥
purī birājati rājati rajanī | rānīṃ kahahim̐ bilokahu sajanī ||
sundara badhunha sāsu lei soī | phanikanha janu sira-mani ura goī ||
प्रात पुनीत-काल प्रभु जागे । अरुनचूड़ बर बोलन लागे ॥
बन्दि मागधन्हि गुनगन गाये । पुरजन द्वार जोहारन आये ॥
prāta punīta-kāla prabhu jāge | arunacūr̤a bara bolana lāge ||
bandi māgadhanhi gunagana gāye | purajana dvāra johārana āye ||
बन्दि बिप्र सुर गुरु पितु माता । पाइ असीस मुदित सब भ्राता ॥
जननिन्ह सादर बदन निहारे । भूपति सङ्ग द्वार पग धारे ॥
bandi bipra sura guru pitu mātā | pāi asīsa mudita saba bhrātā ||
jananinha sādara badana nihāre | bhūpati saṅga dvāra paga dhāre ||
कीन्ह सौच सब सहज सुचि, सरित पुनीत नहाइ ।
प्रातक्रिया करि तात पहिँ, आये चारिउ भाइ ॥
kīnha sauca saba sahaja suci, sarita punīta nahāi |
prātakriyā kari tāta pahim̐, āye cāriu bhāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0