बालकाण्ड

अध्याय 357: मुनि की कृपा से सब हुआ, माताएँ बोलीं

5 श्लोक · 357 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

मुनि की कृपा से सब हुआ, माताएँ बोलीं

माताएँ कहती हैं, हे तात, बलिहारी, मुनि की कृपा से ईश्वर ने तुम्हारे अनेक संकट टाल दिए। दोनों भाइयों ने यज्ञ की रखवाली की और गुरु की कृपा से सब विद्याएँ पाईं। तुम्हारे चरणों की धूल लगते ही मुनिपत्नी तर गई और तुम्हारी कीर्ति संसार में भर गई। कछुए की पीठ, वज्र और पर्वत से भी कठोर शिवधनुष तुमने राजाओं के समाज में तोड़ा। विश्वविजय का यश और जानकी पाकर सब भाई ब्याह कर घर आए। तुम्हारे ये सब अमानुषी कर्म केवल विश्वामित्र की कृपा से सँवरे। आज तुम्हारा चंद्रमुख देखकर संसार में हमारा जन्म सफल हुआ। श्रीराम विनम्र वचन कहकर सब माताओं को संतुष्ट करते हैं, और शंभु, गुरु और ब्राह्मणों के चरणों का स्मरण करके सो जाते हैं।

357.1

मुनि प्रसाद बलि तात तुम्हारी । ईस अनेक करवरें टारी ॥
मख रखवारी करि दुहुँ भाई । गुरु-प्रसाद सब बिद्या पाई ॥

muni prasāda bali tāta tumhārī | īsa aneka karavareṃ ṭārī ||
makha rakhavārī kari duhum̐ bhāī | guru-prasāda saba bidyā pāī ||

357.2

मुनि-तिय तरी लगत पग धूरी । कीरति रही भुवन भरि पूरी ॥
कमठ-पीठि पबि कूट कठोरा । नृप-समाज महँ सिव-धनु तोरा ॥

muni-tiya tarī lagata paga dhūrī | kīrati rahī bhuvana bhari pūrī ||
kamaṭha-pīṭhi pabi kūṭa kaṭhorā | nṛpa-samāja maham̐ siva-dhanu torā ||

357.3

बिस्व-विजय-जल जानकि पाई । आये भवन ब्याहि सब भाई ॥
सकल अमानुष करम तुम्हारे । केवल कौसिक कृपाँ सुधारे ॥

bisva-vijaya-jala jānaki pāī | āye bhavana byāhi saba bhāī ||
sakala amānuṣa karama tumhāre | kevala kausika kṛpām̐ sudhāre ||

357.4

आजु सुफल जग जनम हमारा । देखि तात बिधुबदन तुम्हारा ॥
जे दिन गये तुम्हहिँ बिनु देखें । ते बिरचि जनि पारहिँ लेखें ॥

āju suphala jaga janama hamārā | dekhi tāta bidhubadana tumhārā ||
je dina gaye tumhahim̐ binu dekheṃ | te biraci jani pārahim̐ lekheṃ ||

दो॰ 357दोहा

राम प्रतोषीं मातु सब, कहि बिनीत बर बैन ।
सुमिरि सम्भु-गुरु-बिप्र-पद, किये नींद-बस नैन ॥

rāma pratoṣīṃ mātu saba, kahi binīta bara baina |
sumiri sambhu-guru-bipra-pada, kiye nīṃda-basa naina ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0