बालकाण्ड

अध्याय 356: माताओं ने ताड़का और सुबाहु की बात पूछी

5 श्लोक · 356 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

माताओं ने ताड़का और सुबाहु की बात पूछी

राजा के सहज सुहावने वचन सुनकर रानियाँ सोने और मणियों से जड़े पलंग बिछवाती हैं, जिन पर गाय के दूध के फेन जैसी कोमल उजली चादरें हैं। सुंदर तकिए, सुगंधित धूप, रत्नों के दीपक और मनोहर चँदोवे हैं। सुंदर सेज सजाकर वे प्रेम से श्रीराम को उठाकर पलंग पर लिटाती हैं। श्रीराम भाइयों को बार बार सोने की आज्ञा देते हैं और वे अपनी अपनी सेज पर सो जाते हैं। प्रभु के श्याम, कोमल और सुंदर अंग देखकर सब माताएँ प्रेम से पूछती हैं कि हे तात, मार्ग में जाते हुए भयानक ताड़का को तुमने किस प्रकार मारा। और वे घोर निशाचर, विकट योद्धा मारीच और सुबाहु, जो युद्ध में किसी को कुछ नहीं गिनते थे, उन्हें सहायकों सहित कैसे मारा।

356.1

भूप बचन सुनि सहज सुहाये । जरित कनक-मनि पलँग डसाये ॥
सुभग सुरभि पय फेन समाना । कोमल कलित सुपेतीं नाना ॥

bhūpa bacana suni sahaja suhāye | jarita kanaka-mani palam̐ga ḍasāye ||
subhaga surabhi paya phena samānā | komala kalita supetīṃ nānā ||

356.2

उपबरहन-बर बरनि न जाहीँ । खग-सुगन्ध मनि-मन्दिर माहीं ॥
रतन दीप सुठि चारु चँदोवा । कहत न बनइ जान जेहिं जोवा ॥

upabarahana-bara barani na jāhīm̐ | khaga-sugandha mani-mandira māhīṃ ||
ratana dīpa suṭhi cāru cam̐dovā | kahata na banai jāna jehiṃ jovā ||

356.3

सेज रुचिर रचि रामु उठाये । प्रेम-समेत पलँग पौढ़ाये ॥
आज्ञा पुनि पुनि भाइन्ह दीन्ही । निज निज सेज सयन तिन्ह कीन्ही ॥

seja rucira raci rāmu uṭhāye | prema-sameta palam̐ga paur̤hāye ||
ājñā puni puni bhāinha dīnhī | nija nija seja sayana tinha kīnhī ||

356.4

देखि स्याम मृदु मञ्जुल गाता । कहहिँ सप्रेम बचन सब माता ॥
मारग जात भयावनि भारी । केहि बिधि तात ताड़का भारी ॥

dekhi syāma mṛdu mañjula gātā | kahahim̐ saprema bacana saba mātā ||
māraga jāta bhayāvani bhārī | kehi bidhi tāta tār̤akā bhārī ||

दो॰ 356दोहा

घोर निसाचर बिकट भट, समर गनहिँ नहिं काहु ।
मारे सहित सहाय किमि, खल मारीच सुबाहु ॥

ghora nisācara bikaṭa bhaṭa, samara ganahim̐ nahiṃ kāhu |
māre sahita sahāya kimi, khala mārīca subāhu ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0