बालकाण्ड

अध्याय 355: बहुओं को पलकों की तरह रखना

5 श्लोक · 355 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

बहुओं को पलकों की तरह रखना

सुंदर स्त्रियाँ मंगलगीत गाती हैं और सुख देने वाली मनोहर रात हो जाती है। सबको पान मिलते हैं। श्रीराम को देखकर और राजा की आज्ञा पाकर सब सिर नवाकर अपने अपने घर जाते हैं। तुलसीदास कहते हैं कि उस समय के प्रेम, आनंद, विनोद, बड़ाई और समाज की शोभा को सौ सरस्वती, शेष, ब्रह्मा और महेश भी नहीं कह सकते, तो मैं कैसे वर्णन करूँ। क्या केंचुआ धरती को सिर पर उठा सकता है। राजा सबका सम्मान करके कोमल वचनों से रानियों को बुलाकर कहते हैं कि बहुएँ अभी लड़कियाँ हैं और पराए घर आई हैं, इन्हें ऐसे रखना जैसे पलकें आँखों को रखती हैं। लड़के थके हैं और नींद में हैं, जाकर इन्हें सुलाओ। यह कहकर श्रीराम के चरणों में चित्त लगाए राजा विश्रामगृह को जाते हैं।

355.1

मङ्गल गान करहिँ बर भामिनि । भइ सुखमूल मनोहर जामिनि ॥
अँचइ पान सब काहूँ पाये । खग-सुगन्ध भूषित छबि छाये ॥

maṅgala gāna karahim̐ bara bhāmini | bhai sukhamūla manohara jāmini ||
am̐cai pāna saba kāhūm̐ pāye | khaga-sugandha bhūṣita chabi chāye ||

355.2

रामहि देखि रजायसु पाई । निज निज भवन चले सिर नाई ॥
प्रेम प्रमोद बिनोद बड़ाई । समउ समाज मनोहरताई ॥

rāmahi dekhi rajāyasu pāī | nija nija bhavana cale sira nāī ||
prema pramoda binoda bar̤āī | samau samāja manoharatāī ||

355.3

कहि न सकहिँ सत सारद सेसू । बेद बिरञ्चि महेस गनेसू ॥
सो मैं कहउँ कवन विधि बरनी । भूमिनाग सिर धरइ कि धरनी ॥

kahi na sakahim̐ sata sārada sesū | beda birañci mahesa ganesū ||
so maiṃ kahaum̐ kavana vidhi baranī | bhūmināga sira dharai ki dharanī ||

355.4

नृप सब भाँति सबहिँ सनमानी । कहि मृदु बचन बोलाई रानी ॥
बधू लरिकनीं पर घर आईं । राखेउ नयन पलक की नाई ॥

nṛpa saba bhām̐ti sabahim̐ sanamānī | kahi mṛdu bacana bolāī rānī ||
badhū larikanīṃ para ghara āīṃ | rākheu nayana palaka kī nāī ||

दो॰ 355दोहा

लरिका श्रमित उनीद-अस, सयन करावहु जाइ ।
अस कहि गे बिश्रामगृहँ, राम-चरन चित लाइ ॥

larikā śramita unīda-asa, sayana karāvahu jāi |
asa kahi ge biśrāmagṛham̐, rāma-carana cita lāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0