बालकाण्ड

अध्याय 354: बहुओं को दुलारते राजा दशरथ

5 श्लोक · 354 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

बहुओं को दुलारते राजा दशरथ

सबका सब प्रकार सम्मान करके, हृदय में भरपूर उत्साह लिए दशरथ रनिवास में पधारते हैं और बहुओं सहित कुमारों को निहारते हैं। वे आनंद से उन्हें गोद में ले लेते हैं, उस सुख को कौन कह सकता है। वे प्रेम से बहुओं को गोद में बैठाते हैं और बार बार हर्षित होकर दुलारते हैं। राजा बताते हैं कि विवाह किस प्रकार हुआ, और सुनकर सब हर्षित होते हैं। वे भाट की तरह राजा जनक के गुण, शील, प्रीति और संपदा का वर्णन करते हैं, और रानियाँ प्रसन्न होती हैं। फिर पुत्रों सहित स्नान करके राजा ब्राह्मणों, गुरु और कुटुंबियों को बुलाते हैं और अनेक प्रकार का भोजन होता है। तब तक पाँच घड़ी रात बीत जाती है।

354.1

सब विधि सबहि समदि नरनाहू । रहा हृदयँ भरि पूरि उछाहू ॥
जहँ रनिवास तहाँ पगु धारे । सहित बहूटिन्ह कुअँर निहारे ॥

saba vidhi sabahi samadi naranāhū | rahā hṛdayam̐ bhari pūri uchāhū ||
jaham̐ ranivāsa tahām̐ pagu dhāre | sahita bahūṭinha kuam̐ra nihāre ||

354.2

लिये गोद करि मोद समेता । को कहि सकइ भयउ सुख जेता ॥
बधू सप्रेम गोद बैठारीं । बार बार हियँ हरषि दुलारीं ॥

liye goda kari moda sametā | ko kahi sakai bhayau sukha jetā ||
badhū saprema goda baiṭhārīṃ | bāra bāra hiyam̐ haraṣi dulārīṃ ||

354.3

देखि, समाज मुदित रनिवासू । सब कें उर अनन्द कियो बासू ॥
कहेउ भूप जिमि भयउ बिबाहू । सुनि हरष हाइ सब काहू ॥

dekhi, samāja mudita ranivāsū | saba keṃ ura ananda kiyo bāsū ||
kaheu bhūpa jimi bhayau bibāhū | suni haraṣa hāi saba kāhū ||

354.4

जनक राज गुन सीलु बड़ाई । प्रीति रीति सम्पदा सुहाई ॥
बहु बिधि भूप भाट जिमि बरनी । रानीं सब प्रमुदित सुनि करनी ॥

janaka rāja guna sīlu bar̤āī | prīti rīti sampadā suhāī ||
bahu bidhi bhūpa bhāṭa jimi baranī | rānīṃ saba pramudita suni karanī ||

दो॰ 354दोहा

सुतन्ह समेत नहाइ नृप, बोलि बिप्र गुरु ज्ञाति ।
भोजन कीन्ह अनेक विधि, घरी पञ्च गइ राति ॥

sutanha sameta nahāi nṛpa, boli bipra guru jñāti |
bhojana kīnha aneka vidhi, gharī pañca gai rāti ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0