बालकाण्ड

अध्याय 353: गुरु का नेग, सबको उपहार, देवता लौटे

5 श्लोक · 353 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

गुरु का नेग, सबको उपहार, देवता लौटे

बड़े प्रेम से दशरथ पुत्रों और सारी संपदा को गुरु के आगे रखकर विनती करते हैं। मुनिनायक वसिष्ठ केवल अपना नेग माँगकर लेते हैं और बहुत प्रकार आशीर्वाद देते हैं। सीता सहित श्रीराम को हृदय में धारण करके गुरु प्रसन्न मन से अपने घर जाते हैं। फिर राजा सब ब्राह्मणियों को बुलाकर सुंदर वस्त्र और गहने पहनाते हैं। वे नगर की सुहागिनों को बुलाकर रुचि के अनुसार पहनावा देते हैं। नेग पाने वाले सब अपना नेग लेते हैं और राजा उनकी रुचि के अनुसार देते हैं। प्रिय पाहुनों और पूज्य जनों का भली भाँति सम्मान होता है। रघुवीर का विवाह देखकर देवता फूल बरसाते हैं, उत्सव की सराहना करते हैं, और नगाड़े बजाते हुए सुख पाकर अपने अपने लोकों को चलते हैं, आपस में श्रीराम का यश कहते हुए।

353.1

बिनय कीन्ह उर अति अनुरागें । सुत सम्पदा राखि सब आगें ॥
नेग माँगि मुनिनायक लीन्हा । आसिरबाद बहुत बिधि दीन्हा ॥

binaya kīnha ura ati anurāgeṃ | suta sampadā rākhi saba āgeṃ ||
nega mām̐gi munināyaka līnhā | āsirabāda bahuta bidhi dīnhā ||

353.2

उर धरि रामहि सीय समेता । हरषि कीन्ह गुरु गवन निकेता ॥
विप्र-बधू सब भूप बोलाई । चैल चारु भूषन पहिराई ॥

ura dhari rāmahi sīya sametā | haraṣi kīnha guru gavana niketā ||
vipra-badhū saba bhūpa bolāī | caila cāru bhūṣana pahirāī ||

353.3

बहुरि बोलाइ सुआसिनि लीन्हीं । रुचि बिचारि पहिरावनि दीन्हीँ ॥
नेगी नेग-जोग सब लेहीं । रुचि अनुरूप भूपमनि देहीं ॥

bahuri bolāi suāsini līnhīṃ | ruci bicāri pahirāvani dīnhīm̐ ||
negī nega-joga saba lehīṃ | ruci anurūpa bhūpamani dehīṃ ||

353.4

प्रिय पाहुने पूज्य जे, जाने । भूपति भली भाँति सनमाने ॥
देव देखि रघुबीर बिबाहू । बरषि प्रसून प्रसंसि उछाहू ॥

priya pāhune pūjya je, jāne | bhūpati bhalī bhām̐ti sanamāne ||
deva dekhi raghubīra bibāhū | baraṣi prasūna prasaṃsi uchāhū ||

दो॰ 353दोहा

चले निसान बजाइ सुर, निज निज पुर सुख पाइ ।
कहत परसपर राम-जस, प्रेम न हृदयँ समाइ ॥

cale nisāna bajāi sura, nija nija pura sukha pāi |
kahata parasapara rāma-jasa, prema na hṛdayam̐ samāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0