बालकाण्ड

अध्याय 349: माताएँ निहारती हुई घर ले चलीं

5 श्लोक · 349 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

माताएँ निहारती हुई घर ले चलीं

माताएँ बार बार आरती उतारती हैं, उनके प्रेम और आनंद को कौन कह सकता है। वे नाना प्रकार के गहने, मणि और वस्त्र अनगिनत भाँति न्योछावर करती हैं। बहुओं सहित चारों पुत्रों को देखकर माताएँ परमानंद में मग्न हैं। बार बार सीता और श्रीराम की छवि देखकर वे संसार में अपना जीवन सफल मानती हैं। सखियाँ बार बार सीता का मुख देखती हैं और अपने पुण्य की सराहना करती हुई गाती हैं। चारों मनोहर जोड़ियाँ देखकर सरस्वती सारी उपमाएँ ढूँढ डालती हैं, पर सब बहुत छोटी लगती हैं, इसलिए वे एकटक रूप निहारती रह जाती हैं। वेद, नीति और कुल की रीति निभाकर, अर्घ्य देकर और पाँवड़े बिछाकर माताएँ परछन पूरा करती हैं और बहुओं सहित पुत्रों को महल में ले चलती हैं।

349.1

करहिँ आरती बारहिँ बारा । प्रेम प्रमोद कहइ को पारा ॥
भूषन मनि पट नाना जाती । करही निछावरि अगनित भाँती ॥

karahim̐ āratī bārahim̐ bārā | prema pramoda kahai ko pārā ||
bhūṣana mani paṭa nānā jātī | karahī nichāvari aganita bhām̐tī ||

349.2

बधुन्ह समेत देखि सुत चारी । परमानन्द मगन महतारी ॥
पुनि पुनि सीय-राम छवि देखी । मुदित सफल जग जीवन लेखी ॥

badhunha sameta dekhi suta cārī | paramānanda magana mahatārī ||
puni puni sīya-rāma chavi dekhī | mudita saphala jaga jīvana lekhī ||

349.3

सखीं सीय-मुख पुनि पुनि चाही । गान करहिं निज-सुकृत सराही ॥
बरषहिँ सुमन छनहिँ छन देवा । नाचहिँ गावहिँ लावहिं सेवा ॥

sakhīṃ sīya-mukha puni puni cāhī | gāna karahiṃ nija-sukṛta sarāhī ||
baraṣahim̐ sumana chanahim̐ chana devā | nācahim̐ gāvahim̐ lāvahiṃ sevā ||

349.4

देखि मनोहर चारिउ जोरीं । सारद उपमा सकल ढँढोरीं ॥
देत न बनइ निपट लघु लागी । एकटक रहीं रूप अनुरागीँ ॥

dekhi manohara cāriu jorīṃ | sārada upamā sakala ḍham̐ḍhorīṃ ||
deta na banai nipaṭa laghu lāgī | ekaṭaka rahīṃ rūpa anurāgīm̐ ||

दो॰ 349दोहा

निगम-नीति-कुल रीति करि, अरघ पाँवड़े देत ।
बधुन्ह सहित सुत परिछि सब, चलीँ लवाइ निकेत ॥

nigama-nīti-kula rīti kari, aragha pām̐var̤e deta |
badhunha sahita suta parichi saba, calīm̐ lavāi niketa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0