मुनि-मंडलिहि जनक सिर नावा । आसिरबाद सबहि सन पावा ॥
सादर पुनि भेँटे जामाता । रूप-सील-गुन--निधि सब भ्राता ॥
muni-maṃḍalihi janaka sira nāvā | āsirabāda sabahi sana pāvā ||
sādara puni bhem̐ṭe jāmātā | rūpa-sīla-guna--nidhi saba bhrātā ||
5 श्लोक · 341 में से 361
जनक मुनिमंडली को सिर नवाकर सबका आशीर्वाद पाते हैं। फिर वे चारों दामादों से आदर से मिलते हैं। हाथ जोड़कर वे श्रीराम से प्रेम भरे वचन कहते हैं। हे राम, मैं आपकी प्रशंसा कैसे करूँ, आप मुनियों और महेश के मन रूपी मानसरोवर के हंस हैं। आपके लिए योगी क्रोध, मोह, ममता और मद छोड़कर योग साधते हैं। आप व्यापक ब्रह्म हैं, अलख और अविनाशी, चिदानंद, निर्गुण होकर भी गुणों की राशि। मन सहित वाणी आपको नहीं जानती, तर्क करने वाले अनुमान नहीं लगा पाते, वेद आपकी महिमा को नेति कहकर बताते हैं, और आप तीनों कालों में एकरस हैं। वही समस्त सुखों का मूल आज मेरी आँखों का विषय बना है। ईश्वर अनुकूल हों तो जगत के जीव को सब सुलभ हो जाता है।
मुनि-मंडलिहि जनक सिर नावा । आसिरबाद सबहि सन पावा ॥
सादर पुनि भेँटे जामाता । रूप-सील-गुन--निधि सब भ्राता ॥
muni-maṃḍalihi janaka sira nāvā | āsirabāda sabahi sana pāvā ||
sādara puni bhem̐ṭe jāmātā | rūpa-sīla-guna--nidhi saba bhrātā ||
जोरि पङ्करुह-पानि सुहाए । बोले बचन प्रेम जनु जाये ॥
राम करउँ केहि भाँति प्रसंसा । मुनि-महेस-मन-मानस हंसा ॥
jori paṅkaruha-pāni suhāe | bole bacana prema janu jāye ||
rāma karaum̐ kehi bhām̐ti prasaṃsā | muni-mahesa-mana-mānasa haṃsā ||
करहिं जोग जोगी जेहि लागी । कोह मोहु ममता मद त्यागी ॥
व्यापक ब्रह्म अलख अबिनासी । चिदानन्द निरगुन गुन-रासी ॥
karahiṃ joga jogī jehi lāgī | koha mohu mamatā mada tyāgī ||
vyāpaka brahma alakha abināsī | cidānanda niraguna guna-rāsī ||
मन समेत जेहि जान न बानी । तरकि न सकहिँ सकल अनुमानी ॥
महिमा निगम नेति कहि कहई । जो तिहुँ काल एकरस अहई ॥
mana sameta jehi jāna na bānī | taraki na sakahim̐ sakala anumānī ||
mahimā nigama neti kahi kahaī | jo tihum̐ kāla ekarasa ahaī ||
नयन बिषय मो कहुँ भयउ, सो समस्त-सुख-मूल ।
सबइ सुलभ जग जीव कहँ, भये ईस अनुकूल ॥
nayana biṣaya mo kahum̐ bhayau, so samasta-sukha-mūla |
sabai sulabha jaga jīva kaham̐, bhaye īsa anukūla ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0