नृप करि बिनय महाजन फेरे । सादर सकल मागने टेरे ॥
भूषन बसन बाजि गज दीन्हे । प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे ॥
nṛpa kari binaya mahājana phere | sādara sakala māgane ṭere ||
bhūṣana basana bāji gaja dīnhe | prema poṣi ṭhār̤he saba kīnhe ||
5 श्लोक · 340 में से 361
दशरथ विनयपूर्वक नगर के प्रतिष्ठित जनों को लौटाते हैं और सब याचकों को बुलाकर गहने, वस्त्र, घोड़े और हाथी देते हैं, जब तक सब संतुष्ट न हो जाएँ। वे बार बार यश गाते हुए श्रीराम को हृदय में रखकर लौट जाते हैं। पर कोसलपति बार बार कहते हैं, तब भी जनक प्रेमवश लौटना नहीं चाहते। अंत में दशरथ सुहावने वचन कहते हैं कि महाराज, अब लौटिए, आप बहुत दूर आ गए। फिर वे रथ से उतरकर खड़े हो जाते हैं और उनकी आँखों में प्रेम का प्रवाह उमड़ आता है। तब विदेह हाथ जोड़कर स्नेह के अमृत में डूबे वचन बोलते हैं कि मैं किस प्रकार विनती करूँ, महाराज, आपने मुझे बड़ाई दी है। दोनों समधी परस्पर सब प्रकार सम्मान करते हैं और प्रीति हृदय में नहीं समाती।
नृप करि बिनय महाजन फेरे । सादर सकल मागने टेरे ॥
भूषन बसन बाजि गज दीन्हे । प्रेम पोषि ठाढ़े सब कीन्हे ॥
nṛpa kari binaya mahājana phere | sādara sakala māgane ṭere ||
bhūṣana basana bāji gaja dīnhe | prema poṣi ṭhār̤he saba kīnhe ||
बार बार बिरिदावलि भाखी । फिरे सकल रामहि उर राखी ॥
बहुरि बहुरि कोसलपति कहहीं । जनक प्रेमबस फिरै न चहहीं ॥
bāra bāra biridāvali bhākhī | phire sakala rāmahi ura rākhī ||
bahuri bahuri kosalapati kahahīṃ | janaka premabasa phirai na cahahīṃ ||
पुनि कह भूपति बचन सुहाये । फिरिअ महीस दूरि बड़ि आये ॥
राउ बहोरि उतरि भये ठाढ़े । प्रेम-प्रवाह बिलोचन बाढ़े ॥
puni kaha bhūpati bacana suhāye | phiria mahīsa dūri bar̤i āye ||
rāu bahori utari bhaye ṭhār̤he | prema-pravāha bilocana bār̤he ||
तब विदेह बोले कर जोरी । बचन सनेह-सुधाँ जनु बोरी ॥
करउँ कवन बिधि बिनय बनाई । महाराज मोहि दीन्हि बड़ाई ॥
taba videha bole kara jorī | bacana saneha-sudhām̐ janu borī ||
karaum̐ kavana bidhi binaya banāī | mahārāja mohi dīnhi bar̤āī ||
कोसलपति समधी सजन, सनमाने सब भाँति ।
मिलनि परसपर बिनय अति, प्रीति न हृदयँ समाति ॥
kosalapati samadhī sajana, sanamāne saba bhām̐ti |
milani parasapara binaya ati, prīti na hṛdayam̐ samāti ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0