बालकाण्ड

अध्याय 336: श्रीराम की विदा, सुनयना ने सीता सौंपी

6 श्लोक · 336 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम की विदा, सुनयना ने सीता सौंपी

श्रीराम की छवि देखकर रानियाँ प्रेम में विवश होकर बार बार उनके पैरों लगती हैं, लाज नहीं रहती। वे उबटन लगाकर भाइयों को नहलाती हैं और स्नेह से भोजन कराती हैं। तब अवसर देखकर श्रीराम शील, स्नेह और संकोच भरी वाणी में कहते हैं कि राजा अवध जाना चाहते हैं और हमें विदा लेने भेजा है। माता, प्रसन्न मन से आज्ञा दीजिए और हमें अपने बालक जानकर सदा स्नेह रखिए। रनिवास बिलख उठता है। वे कुमारियों को हृदय से लगाकर पतियों को सौंपती हैं। सीता की माता हाथ जोड़कर सीता को श्रीराम को सौंपती हैं और कहती हैं कि आप सबकी गति जानते हैं। सीता को हम सबके प्राणों से प्यारी जानिए और उसे अपनी दासी मानिए। आप पूर्णकाम हैं और भक्तों के गुण ही देखते हैं।

336.1

देखि राम छबि अति अनुरागीं । प्रेम-विवस पुनि पुनि पद लागीँ ॥
रही न लाज प्रीति उर छाई । सहज सनेह बरनि किमि जाई ॥

dekhi rāma chabi ati anurāgīṃ | prema-vivasa puni puni pada lāgīm̐ ||
rahī na lāja prīti ura chāī | sahaja saneha barani kimi jāī ||

336.2

भाइन्ह सहित उबटि अन्हवाये । छरस असन अति हेतु जेवाँए ॥
बोले राम सुअवसर जानी । सील-सनेह-सकुचमय बानी ॥

bhāinha sahita ubaṭi anhavāye | charasa asana ati hetu jevām̐e ||
bole rāma suavasara jānī | sīla-saneha-sakucamaya bānī ||

336.3

राउ अवधपुर चहत सिधाये । विदा होन हम इहाँ पठाये ॥
मातु मुदित-मन आयसु देहू । बालक जानि करब नित नेहू ॥

rāu avadhapura cahata sidhāye | vidā hona hama ihām̐ paṭhāye ||
mātu mudita-mana āyasu dehū | bālaka jāni karaba nita nehū ||

336.4

सुनत बचन बिलखेउ रनिवासू । बोलि न सकहिँ प्रेम-बस सासू ॥
हृदयँ लगाइ कुँअरि सब लीन्ही । पतिन्ह सौंपि बिनती अति कीन्ही ॥

sunata bacana bilakheu ranivāsū | boli na sakahim̐ prema-basa sāsū ||
hṛdayam̐ lagāi kum̐ari saba līnhī | patinha sauṃpi binatī ati kīnhī ||

336.छं॰ 1छन्द

करि बिनय सिय रामहि समरपी, जोरि कर पुनि पुनि कहै ।
बलि जाँउ तात सुजान तुम्ह कहँ, बिदित गति सब की अहै ॥
परिवार पुरजन मोहि राजहि, प्रान प्रिय सिय जानिबी ।
तुलसी सुसील सनेह लखि निज,-किङ्करी करि मानिबी ॥

kari binaya siya rāmahi samarapī, jori kara puni puni kahai |
bali jām̐u tāta sujāna tumha kaham̐, bidita gati saba kī ahai ||
parivāra purajana mohi rājahi, prāna priya siya jānibī |
tulasī susīla saneha lakhi nija,-kiṅkarī kari mānibī ||

336.सो॰ 336सोरठा

तुम्ह परिपूरन-काम, जान-सिरोमनि भाव प्रिय ।
जन-गुन-गाहक राम, दोष-दलन करुनायतन ॥

tumha paripūrana-kāma, jāna-siromani bhāva priya |
jana-guna-gāhaka rāma, doṣa-dalana karunāyatana ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0