बालकाण्ड

अध्याय 337: श्रीराम चले, माताएँ बेटियों से बिछुड़ न सकीं

5 श्लोक · 337 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

श्रीराम चले, माताएँ बेटियों से बिछुड़ न सकीं

इतना कहकर रानी श्रीराम के चरण पकड़कर चुप हो जाती हैं, मानो उनकी वाणी प्रेम के कीचड़ में धँस गई हो। श्रीराम सास का अनेक प्रकार से सम्मान करते हैं, हाथ जोड़कर विदा माँगते हैं और बार बार प्रणाम करते हैं। आशीर्वाद पाकर वे फिर सिर नवाते हैं और भाइयों सहित चल पड़ते हैं। उनकी मधुर मूर्ति हृदय में रखकर सब रानियाँ प्रेम से शिथिल हो जाती हैं। फिर धीरज धरकर वे कुमारियों को बुलाती हैं और बार बार भेंटती हैं। कुछ दूर पहुँचाकर लौटती हैं और फिर मिलती हैं। अंत में सखियाँ उन्हें ऐसे अलग करती हैं जैसे बछड़े से गाय को हटाया जाता है। सब नर नारी और रनिवास प्रेम से विवश हैं, मानो करुणा और विरह ने जनकपुर को अपना घर बना लिया हो।

337.1

अस कहि रही चरन गहि रानी । प्रेम पंक जनु गिरा समानी ॥
सुनि सनेह सानी बर बानी । बहु बिधि राम सासु सनमानी ॥

asa kahi rahī carana gahi rānī | prema paṃka janu girā samānī ||
suni saneha sānī bara bānī | bahu bidhi rāma sāsu sanamānī ||

337.2

राम बिदा माँगा कर जोरी । कीन्ह प्रनाम बहोरि बहोरी ॥
पाइ असीस बहुरि सिर नाई । भाइन्ह सहित चले रघुराई ॥

rāma bidā mām̐gā kara jorī | kīnha pranāma bahori bahorī ||
pāi asīsa bahuri sira nāī | bhāinha sahita cale raghurāī ||

337.3

मञ्जु-मधुर-मूरति उर आनी । भई सनेह सिथिल सब रानी ॥
पुनि धीरज धरि कुँअरि हँकारी । बार बार भेटहिं महतारीं ॥

mañju-madhura-mūrati ura ānī | bhaī saneha sithila saba rānī ||
puni dhīraja dhari kum̐ari ham̐kārī | bāra bāra bheṭahiṃ mahatārīṃ ||

337.4

पहुँचावहिं फिरि मिलहिँ बहोरी । बढ़ी परसपर प्रीति न थोरी ॥
पुनि पुनि मिलत सखिन्ह बिलगाई । बाल बच्छ जिमि धेनु लवाई ॥

pahum̐cāvahiṃ phiri milahim̐ bahorī | bar̤hī parasapara prīti na thorī ||
puni puni milata sakhinha bilagāī | bāla baccha jimi dhenu lavāī ||

दो॰ 337दोहा

प्रेम-विबस नरनारि सब, सखिन्ह सहित रनिवास ।
मानहुँ कीन्ह विदेहपुर, करुनाँ-बिरहँ-निवास ॥

prema-vibasa naranāri saba, sakhinha sahita ranivāsa |
mānahum̐ kīnha videhapura, karunām̐-biraham̐-nivāsa ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0