बालकाण्ड

अध्याय 329: विवाह का भोज और मीठी गारियाँ

5 श्लोक · 329 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

विवाह का भोज और मीठी गारियाँ

पहले पाँच ग्रास लेकर सब भोजन करने लगते हैं और स्त्रियों की गाई गारियाँ सुनकर बहुत प्रसन्न होते हैं। अमृत जैसे अनेक पकवान परोसे जाते हैं। चतुर रसोइये ऐसे व्यंजन परोसते जाते हैं जिनके नाम कौन जाने। वेद ने चार प्रकार का भोजन कहा है, और यहाँ एक एक प्रकार का भी वर्णन नहीं हो सकता। छहों रसों के व्यंजन हैं और एक एक रस के अनगिनत रूप। भोजन करते समय स्त्रियाँ पुरुषों के नाम ले लेकर मधुर स्वर में गारी देती हैं। सुहावने समय की गारी सुनकर राजा दशरथ समाज सहित हँसते हैं। भोजन के बाद आदर से आचमन कराया जाता है। फिर जनक पान देकर समाज सहित दशरथ का पूजन करते हैं, और राजाओं के सिरमौर प्रसन्न होकर जनवासे लौटते हैं।

329.1

पञ्च कवल करि जेवन लागे । गारि गान सुनि अति अनुरागे ॥
भाँति अनेक परे पकवाने । सुधा सरिस नहिँ जाहिँ बखाने ॥

pañca kavala kari jevana lāge | gāri gāna suni ati anurāge ||
bhām̐ti aneka pare pakavāne | sudhā sarisa nahim̐ jāhim̐ bakhāne ||

329.2

परुसन लगे सुआर सुजाना । बिञ्जन बिबिध नाम को जाना ॥
चारि भाँति भोजन बिधि गाई । एक एक विधि बरनि न जाई ॥

parusana lage suāra sujānā | biñjana bibidha nāma ko jānā ||
cāri bhām̐ti bhojana bidhi gāī | eka eka vidhi barani na jāī ||

329.3

छरस रुचिर बिञ्जन बहु जाती । एक एक रस अगनित भाँती ॥
जेवँत देहिँ मधुर धुनि गारी । लइ लइ नाम पुरुष अरु नारी ॥

charasa rucira biñjana bahu jātī | eka eka rasa aganita bhām̐tī ||
jevam̐ta dehim̐ madhura dhuni gārī | lai lai nāma puruṣa aru nārī ||

329.4

समय सुहावन गारि बिराजा । हँसत राउ सुनि सहित समाजा ॥
एहि बिधि सबहीं भोजन कीन्हा । आदर सहित आचमन दीन्हा ॥

samaya suhāvana gāri birājā | ham̐sata rāu suni sahita samājā ||
ehi bidhi sabahīṃ bhojana kīnhā | ādara sahita ācamana dīnhā ||

दो॰ 329दोहा

देइ पान पूजे जनक, दसरथ सहित समाज ।
जनवासेहि गवने मुदित, सकल-भूप-सिरताज ॥

dei pāna pūje janaka, dasaratha sahita samāja |
janavāsehi gavane mudita, sakala-bhūpa-siratāja ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0