बालकाण्ड

अध्याय 328: भोज से पहले जनक ने चरण धोए

5 श्लोक · 328 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

भोज से पहले जनक ने चरण धोए

जनक भोज तैयार कराकर बारातियों को बुलवाते हैं। मार्ग में अनुपम वस्त्रों के पाँवड़े पड़ते हैं और दशरथ पुत्रों सहित पधारते हैं। जनक आदर से सबके पैर पखारते हैं और यथायोग्य पीढ़ों पर बैठाते हैं। वे अवधपति के चरण ऐसे शील और स्नेह से धोते हैं कि वर्णन नहीं हो सकता। फिर वे श्रीराम के वे चरणकमल धोते हैं जो शिव के हृदय कमल में छिपे रहते हैं, और तीनों भाइयों को राम के समान जानकर उनके चरण भी अपने हाथों धोते हैं। सबको उचित आसन देकर रसोइयों को बुलाया जाता है। सोने की सींकों और मणियों से सजी पत्तलें परोसी जाती हैं। चतुर और विनम्र रसोइये क्षण भर में सबको दाल, भात और गाय का सुगंधित घी परोस देते हैं।

328.1

पुनि जेवनार भई बहु भाँती । पठये जनक बोलाइ बराती ॥
परत पाँबड़े बसन अनूपा । सुतन्ह समेत गवन कियो भूपा ॥

puni jevanāra bhaī bahu bhām̐tī | paṭhaye janaka bolāi barātī ||
parata pām̐bar̤e basana anūpā | sutanha sameta gavana kiyo bhūpā ||

328.2

सादर सब के पाय पखारे । जथाजोग पीढ़न्ह बैठारे ॥
धोये जनक अवधपति चरना । सील सनेह जाइ नहिँ बरना ॥

sādara saba ke pāya pakhāre | jathājoga pīr̤hanha baiṭhāre ||
dhoye janaka avadhapati caranā | sīla saneha jāi nahim̐ baranā ||

328.3

बहुरि राम-पद-पङ्कज धोये । जे हर-हृदय-कमल मह गोये ॥
तीनिउ भाइ राम सम जानी । धोये चरन जनक निज-पानी ॥

bahuri rāma-pada-paṅkaja dhoye | je hara-hṛdaya-kamala maha goye ||
tīniu bhāi rāma sama jānī | dhoye carana janaka nija-pānī ||

328.4

आसन उचित सबहि नृप दीन्हे । बोलि सूपकारी सब लीन्हे ॥
सादर लगे परन पनवारे । कनक-कील मनि पान सँवारे ॥

āsana ucita sabahi nṛpa dīnhe | boli sūpakārī saba līnhe ||
sādara lage parana panavāre | kanaka-kīla mani pāna sam̐vāre ||

दो॰ 328दोहा

सूपोदन सुरभी-सरपि, सुन्दर स्वाद पुनीत ।
छन महँ सब कें परसि गे, चतुर सुआर बिनीत ॥

sūpodana surabhī-sarapi, sundara svāda punīta |
chana maham̐ saba keṃ parasi ge, catura suāra binīta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0