राम चरित चिन्तामनि चारू । सन्त सुमति तिय सुभग सिंगारू ॥
जग मङ्गल गुन ग्राम राम के । दानि मुकुति धन धरम धाम के ॥
rāma carita cintāmani cārū | santa sumati tiya subhaga siṃgārū ||
jaga maṅgala guna grāma rāma ke | dāni mukuti dhana dharama dhāma ke ||
9 श्लोक · 32 में से 361
रामचरित सुन्दर चिन्तामणि है और सद्बुद्धि का श्रृंगार। राम के गुण जगत का मंगल करते हैं और मुक्ति, धन और धर्म देते हैं। वे ज्ञान और वैराग्य के सद्गुरु हैं, संसार के रोग के देववैद्य, सीताराम के प्रेम के माता पिता, और सब व्रतों के बीज। वे पाप और शोक मिटाते हैं। वे काम और क्रोध रूपी हाथियों के लिए सिंह के बच्चे हैं, शिव के पूज्य अतिथि, दरिद्रता के दावानल पर बरसने वाले मेघ, विषय रूपी साँप के लिए मन्त्र, और मोह की रात के लिए सूर्य। दोहे कहते हैं कि राम के गुण कपट और पाखण्ड को वैसे जलाते हैं जैसे आग ईंधन को, और सज्जनों के लिए चाँदनी हैं।
राम चरित चिन्तामनि चारू । सन्त सुमति तिय सुभग सिंगारू ॥
जग मङ्गल गुन ग्राम राम के । दानि मुकुति धन धरम धाम के ॥
rāma carita cintāmani cārū | santa sumati tiya subhaga siṃgārū ||
jaga maṅgala guna grāma rāma ke | dāni mukuti dhana dharama dhāma ke ||
सदगुरु ज्ञान बिराग-जोग के । बिबुध बैद भव भीम रोग के ॥
जननि जनक सिय राम प्रेम के । बीज सकल ब्रत धरम नेम के ॥
sadaguru jñāna birāga-joga ke | bibudha baida bhava bhīma roga ke ||
janani janaka siya rāma prema ke | bīja sakala brata dharama nema ke ||
समन पाप सन्ताप सोक के । प्रिय पालक परलोक लोक के ॥
सचिव सुभट भूपति बिचार के । कुम्भज लोभ उदधि अपार के ॥
samana pāpa santāpa soka ke | priya pālaka paraloka loka ke ||
saciva subhaṭa bhūpati bicāra ke | kumbhaja lobha udadhi apāra ke ||
काम-कोह कलिमल करि गन के । केहरि सावक जन मन बन के ॥
अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद घन दारिद दवारि के ॥
kāma-koha kalimala kari gana ke | kehari sāvaka jana mana bana ke ||
atithi pūjya priyatama purāri ke | kāmada ghana dārida davāri ke ||
मन्त्र महा मनि बिषय ब्याल के । मेटत कठिन कुअङ्क भाल के ॥
हरन मोह तम दिनकर कर से । सेवक सालि पाल जलधर से ॥
mantra mahā mani biṣaya byāla ke | meṭata kaṭhina kuaṅka bhāla ke ||
harana moha tama dinakara kara se | sevaka sāli pāla jaladhara se ||
अभिमत दानि देवतरु बर से । सेवत सुलभ सुखद हरि हर से ॥
सुकबि सरद नभ मन उडुगन से । राम भगत जन जीवन धन से ॥
abhimata dāni devataru bara se | sevata sulabha sukhada hari hara se ||
sukabi sarada nabha mana uḍugana se | rāma bhagata jana jīvana dhana se ||
सकल सुकृत फल भूरि भोग से । जग हित निरुपधि साधु लोग से ॥
सेवक मन मानस मराल से । पावन गङ्ग तरङ्ग माल से ॥
sakala sukṛta phala bhūri bhoga se | jaga hita nirupadhi sādhu loga se ||
sevaka mana mānasa marāla se | pāvana gaṅga taraṅga māla se ||
कुपथ कुतरक कुचालि कलि, कपट दम्भ पाखंड ।
दहन राम गुन ग्राम जिमि, ईंधन अनल प्रचंड ॥
kupatha kutaraka kucāli kali, kapaṭa dambha pākhaṃḍa |
dahana rāma guna grāma jimi, īṃdhana anala pracaṃḍa ||
रामचरित राकेस कर, सरिस सुखद सब काहु ।
सज्जन कुमुद चकोर चित, हित बिसेष बड़ लाहु ॥
rāmacarita rākesa kara, sarisa sukhada saba kāhu |
sajjana kumuda cakora cita, hita biseṣa bar̤a lāhu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0