तदपि कही गुर बारहिँ बारा । समुझि परी कछु मति अनुसारा ॥
भाषाबद्ध करब मैं सोई । मोरें मन प्रबोध जेहिं होई ॥
tadapi kahī gura bārahim̐ bārā | samujhi parī kachu mati anusārā ||
bhāṣābaddha karaba maiṃ soī | moreṃ mana prabodha jehiṃ hoī ||
8 श्लोक · 31 में से 361
फिर भी गुरु ने बार बार कहा, तो बुद्धि भर कुछ समझ में आया। वही अब तुलसीदास भाषा में बाँधेंगे, जिससे उनके अपने मन को बोध हो। जितना बुद्धि और विवेक का बल है, हृदय में हरि की प्रेरणा से उतना कहेंगे, ऐसी कथा जो उनके सन्देह, मोह और भ्रम को हरे और भवनदी की नाव बने। फिर उपमाओं की माला आती है। रामकथा विद्वानों का विश्राम है, सबको आनन्द देने वाली, कलि रूपी साँपों के लिए मोरनी, विवेक की अग्नि के लिए अरणि, कामधेनु, संजीवनी बूटी और धरती पर अमृत की नदी। यमदूतों के लिए वह यमुना जैसी है, मुक्ति के लिए काशी, राम को प्रिय तुलसी, और तुलसीदास के लिए माता हुलसी जैसी। दोहा कहता है कि रामकथा मन्दाकिनी है और निर्मल चित्त चित्रकूट।
तदपि कही गुर बारहिँ बारा । समुझि परी कछु मति अनुसारा ॥
भाषाबद्ध करब मैं सोई । मोरें मन प्रबोध जेहिं होई ॥
tadapi kahī gura bārahim̐ bārā | samujhi parī kachu mati anusārā ||
bhāṣābaddha karaba maiṃ soī | moreṃ mana prabodha jehiṃ hoī ||
जस कछु बुधि-बिबेक-बल मेरें । तस कहिहउँ हियँ हरि के प्रेरें ॥
निज सन्देह-मोह-भ्रम-हरनी । करउँ कथा भव-सरिता-तरनी ॥
jasa kachu budhi-bibeka-bala mereṃ | tasa kahihaum̐ hiyam̐ hari ke prereṃ ||
nija sandeha-moha-bhrama-haranī | karaum̐ kathā bhava-saritā-taranī ||
बुध-बिस्राम सकल-जन-रञ्जनि । राम-कथा कलि-कलुष-बिभञ्जनि ॥
रामकथा-कलि-पंनग-भरनी । पुनि बिबेक-पावक कहँ अरनी ॥
budha-bisrāma sakala-jana-rañjani | rāma-kathā kali-kaluṣa-bibhañjani ||
rāmakathā-kali-paṃnaga-bharanī | puni bibeka-pāvaka kaham̐ aranī ||
रामकथा कलि कामद गाई । सुजन सजीवनि मूरि सुहाई ॥
सोइ बसुधातल सुधा तरङ्गिनि । भय भञ्जनि भ्रम भेक भुअङ्गिनि ॥
rāmakathā kali kāmada gāī | sujana sajīvani mūri suhāī ||
soi basudhātala sudhā taraṅgini | bhaya bhañjani bhrama bheka bhuaṅgini ||
असुर सेन सम नरक निकन्दिनि । साधु बिबुध कुल हित गिरिनन्दिनि ॥
सन्त समाज पयोधि रमा सी । बिस्व भार भर अचल छमा सी ॥
asura sena sama naraka nikandini | sādhu bibudha kula hita girinandini ||
santa samāja payodhi ramā sī | bisva bhāra bhara acala chamā sī ||
जम गन मुहँ मसि जग जमुना सी । जीवन मुकुति हेतु जनु कासी ॥
रामहि प्रिय पावनि तुलसी सी । तुलसिदास हित हियँ हुलसी सी ॥
jama gana muham̐ masi jaga jamunā sī | jīvana mukuti hetu janu kāsī ||
rāmahi priya pāvani tulasī sī | tulasidāsa hita hiyam̐ hulasī sī ||
सिव प्रिय मेकल सैल सुता सी । सकल सिद्धि सुख सम्पति रासी ॥
सदगुन सुरगन अम्ब अदिति सी । रघुवर भगति प्रेम परमिति सी ॥
siva priya mekala saila sutā sī | sakala siddhi sukha sampati rāsī ||
sadaguna suragana amba aditi sī | raghuvara bhagati prema paramiti sī ||
रामकथा मन्दाकिनी, चित्रकूट चित चारु ।
तुलसी सुभग सनेह बन, सिय रघुबीर बिहारु ॥
rāmakathā mandākinī, citrakūṭa cita cāru |
tulasī subhaga saneha bana, siya raghubīra bihāru ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0