जेहिं बर बाजि राम असवारा । तेहि सारदउ न बरनइ पारा ॥
सङ्कर राम-रूप अनुरागे । नयन पञ्चदस अति प्रिय लागे ॥
jehiṃ bara bāji rāma asavārā | tehi sāradau na baranai pārā ||
saṅkara rāma-rūpa anurāge | nayana pañcadasa ati priya lāge ||
6 श्लोक · 317 में से 361
जिस घोड़े पर श्रीराम सवार हैं, उसका वर्णन सरस्वती भी नहीं कर सकतीं। देवता अपने अपने नेत्रों को सौभाग्य मानते हैं। पाँच मुखों वाले शंकर को अपने पंद्रह नेत्र बहुत प्रिय लगते हैं। लक्ष्मी सहित विष्णु मोहित हो जाते हैं। ब्रह्मा हर्षित हैं, पर आठ ही नेत्र होने से पछताते हैं। बारह नेत्रों वाले कार्तिकेय ब्रह्मा से डेढ़ गुना लाभ पाते हैं, और हजार नेत्रों वाले इंद्र गौतम के शाप को परम हित मानते हैं। सब देवता इंद्र से ईर्ष्या करते हैं। दोनों ओर नगाड़े बजते हैं, रघुकुलमणि की जय के साथ फूल बरसते हैं। बारात आती जानकर रानी सुहागिन स्त्रियों को बुलाती हैं और वे आरती सजाकर परछन के लिए चल पड़ती हैं।
जेहिं बर बाजि राम असवारा । तेहि सारदउ न बरनइ पारा ॥
सङ्कर राम-रूप अनुरागे । नयन पञ्चदस अति प्रिय लागे ॥
jehiṃ bara bāji rāma asavārā | tehi sāradau na baranai pārā ||
saṅkara rāma-rūpa anurāge | nayana pañcadasa ati priya lāge ||
हरि हित सहित राम जब जोहे । रमा समेत रमापति मोहे ॥
निरखि राम छबि बिधि हरषाने । आठइ नयन जानि पछिताने ॥
hari hita sahita rāma jaba johe | ramā sameta ramāpati mohe ||
nirakhi rāma chabi bidhi haraṣāne | āṭhai nayana jāni pachitāne ||
सुर सेनप उर अधिक उछाहू । बिधि तैं डेवढ़ लोचन लाहू ॥
रामहि चितव सुरेस सुजाना । गौतम श्रापु परम हित माना ॥
sura senapa ura adhika uchāhū | bidhi taiṃ ḍevar̤ha locana lāhū ||
rāmahi citava suresa sujānā | gautama śrāpu parama hita mānā ||
देव सकल सुरपतिहि सिहाहीँ । आजु पुरन्दर सम कोउ नाहीं ॥
मुदित देव गन रामहि देखी । नृप समाज दुहुँ हरष बिसेखी ॥
deva sakala surapatihi sihāhīm̐ | āju purandara sama kou nāhīṃ ||
mudita deva gana rāmahi dekhī | nṛpa samāja duhum̐ haraṣa bisekhī ||
अति हरष राज-समाज दुहुँ दिसि, दुंदुभीं बाजहिं घनी ।
बरषहिँ सुमन सुर हरषि कहि जय, जयति जय रघुकुलमनी ॥
एहि भाँति जानि बरात आवत, बाजने बहु बाजहीं ।
रानी सुआसिनि बोलि परिछनि हेतु मङ्गल साजहीं ॥
ati haraṣa rāja-samāja duhum̐ disi, duṃdubhīṃ bājahiṃ ghanī |
baraṣahim̐ sumana sura haraṣi kahi jaya, jayati jaya raghukulamanī ||
ehi bhām̐ti jāni barāta āvata, bājane bahu bājahīṃ |
rānī suāsini boli parichani hetu maṅgala sājahīṃ ||
सजि आरती अनेक विधि, मङ्गल सकल सँवारि ।
चलीँ मुदित परिछनि करन, गज-गामिनि बर नारि ॥
saji āratī aneka vidhi, maṅgala sakala sam̐vāri |
calīm̐ mudita parichani karana, gaja-gāmini bara nāri ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0