जिन्ह कर नाम लेत जग माहीं । सकल अमङ्गल-मूल नसाहीं ॥
करतल होहिँ पदारथ-चारी । तेइ सिय-राम कहेउ कामारी ॥
jinha kara nāma leta jaga māhīṃ | sakala amaṅgala-mūla nasāhīṃ ||
karatala hohim̐ padāratha-cārī | tei siya-rāma kaheu kāmārī ||
5 श्लोक · 315 में से 361
कामदेव के शत्रु शिव कहते हैं: जिनका नाम जगत में लेते ही सब अमंगलों की जड़ नष्ट हो जाती है और चारों पदार्थ हथेली पर आ जाते हैं, ये वही सीता और राम हैं। इस प्रकार शम्भु ने देवताओं को समझाया और फिर अपने श्रेष्ठ बैल को आगे बढ़ाया। देवताओं ने दशरथ को जाते देखा, वे आनन्द से पुलकित हैं। साथ में चारों सुन्दर पुत्र ऐसे शोभित हैं मानो सब प्रकार के मोक्ष ने शरीर धारण किया हो। मरकत और सोने के रंग वाली जोड़ियों को देखकर देवताओं को बहुत प्रीति हुई। फिर श्रीराम को देखकर वे हृदय में हर्षित हुए और राजा की सराहना करके फूल बरसाए। उमा सहित पुरारि नख से शिख तक सुन्दर रामरूप को बार बार निहारते हैं; शरीर पुलकित है और नेत्र सजल।
जिन्ह कर नाम लेत जग माहीं । सकल अमङ्गल-मूल नसाहीं ॥
करतल होहिँ पदारथ-चारी । तेइ सिय-राम कहेउ कामारी ॥
jinha kara nāma leta jaga māhīṃ | sakala amaṅgala-mūla nasāhīṃ ||
karatala hohim̐ padāratha-cārī | tei siya-rāma kaheu kāmārī ||
एहि विधि सम्भु सुरन्ह समुझावा । पुनि आगें बर-बसह चलावा ॥
देवन्ह देखे दसरथ जाता । महामोद-मन पुलकित गाता ॥
ehi vidhi sambhu suranha samujhāvā | puni āgeṃ bara-basaha calāvā ||
devanha dekhe dasaratha jātā | mahāmoda-mana pulakita gātā ||
साधु-समाज सङ्ग महिदेवा । जनु तनु धरें करहिँ सुख सेवा ॥
सोहत साथ सुभग सुत चारी । जनु अपबरग सकल तनु--धारी ॥
sādhu-samāja saṅga mahidevā | janu tanu dhareṃ karahim̐ sukha sevā ||
sohata sātha subhaga suta cārī | janu apabaraga sakala tanu--dhārī ||
मरकत कनक बरन तनु जोरी । देखि सुरन्ह भै प्रीति न थोरी ॥
पुनि रामहि बिलोकि हियँ हरषे । नृपहि सराहि सुमन तिन्ह बरषे ॥
marakata kanaka barana tanu jorī | dekhi suranha bhai prīti na thorī ||
puni rāmahi biloki hiyam̐ haraṣe | nṛpahi sarāhi sumana tinha baraṣe ||
राम रूप नख-सिख-सुभग, बारहिँ बार निहारि ।
पुलक गात लोचन सजल, उमा समेत पुरारि ॥
rāma rūpa nakha-sikha-subhaga, bārahim̐ bāra nihāri |
pulaka gāta locana sajala, umā sameta purāri ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0