सुरन्ह सुमङ्गल अवसर जाना । बरषहिँ सुमन बजाइ निसाना ॥
सिव ब्रह्मादिक बिबुध-बरूथा । चढ़े विमानन्हि नाना जूथा ॥
suranha sumaṅgala avasara jānā | baraṣahim̐ sumana bajāi nisānā ||
siva brahmādika bibudha-barūthā | car̤he vimānanhi nānā jūthā ||
5 श्लोक · 314 में से 361
शुभ मंगल अवसर जानकर देवता नगाड़े बजाकर फूल बरसाते हैं। शिव, ब्रह्मा आदि देवताओं के समूह अनेक टोलियों में विमानों पर चढ़े और प्रेम से पुलकित शरीर तथा उत्साह भरे हृदय से रामविवाह देखने चले। जनकपुर को देखकर देवता ऐसे मुग्ध हुए कि सबको अपने अपने लोक छोटे लगने लगे। वे विचित्र मण्डप और उसकी अलौकिक रचना को चकित होकर देखते हैं। नगर के नर नारी रूप के भण्डार, सुघड़, धर्मात्मा, सुशील और चतुर हैं; उन्हें देखकर सब देवता और देवांगनाएँ ऐसे लगे जैसे चाँदनी में तारे। ब्रह्मा को सबसे अधिक आश्चर्य हुआ, क्योंकि उन्हें अपनी रचना कहीं दिखाई नहीं दी। तब शिव ने सब देवताओं को समझाया: आश्चर्य में मत भूलो, हृदय में धीरज धरकर विचार करो कि यह सीता और रघुवीर का विवाह है।
सुरन्ह सुमङ्गल अवसर जाना । बरषहिँ सुमन बजाइ निसाना ॥
सिव ब्रह्मादिक बिबुध-बरूथा । चढ़े विमानन्हि नाना जूथा ॥
suranha sumaṅgala avasara jānā | baraṣahim̐ sumana bajāi nisānā ||
siva brahmādika bibudha-barūthā | car̤he vimānanhi nānā jūthā ||
प्रेम पुलक-तन हृदयँ उछाहू । चले बिलोकन राम बिआहू ॥
देखि जनकपुर सुर अनुरागे । निज निज लोक सबहिँ लघु लागे ॥
prema pulaka-tana hṛdayam̐ uchāhū | cale bilokana rāma biāhū ||
dekhi janakapura sura anurāge | nija nija loka sabahim̐ laghu lāge ||
चितवहिँ चकित बिचित्र बिताना । रचना सकल अलौकिक नाना ॥
नगर-नारि-नर रूप-निधाना । सुघर सुधरम सुसील सुजाना ॥
citavahim̐ cakita bicitra bitānā | racanā sakala alaukika nānā ||
nagara-nāri-nara rūpa-nidhānā | sughara sudharama susīla sujānā ||
तिन्हहिं देखि सब सुर सुरनारीं । भये नखत जनु बिधु उजिआरीं ॥
विधिहि भयउ आचरज बिसेखी । निज करनी कछु कतहुँ न देखी ॥
tinhahiṃ dekhi saba sura suranārīṃ | bhaye nakhata janu bidhu ujiārīṃ ||
vidhihi bhayau ācaraja bisekhī | nija karanī kachu katahum̐ na dekhī ||
सिवँ समुझाये देव सब, जनि आचरज भुलाहु ।
हृदयँ बिचारहु धीर धरि, सिय-रघुबीर-बिआहु ॥
sivam̐ samujhāye deva saba, jani ācaraja bhulāhu |
hṛdayam̐ bicārahu dhīra dhari, siya-raghubīra-biāhu ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0