बालकाण्ड

अध्याय 30: कथा तुलसीदास तक कैसे पहुँची

6 श्लोक · 30 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

कथा तुलसीदास तक कैसे पहुँची

तुलसीदास अपनी कथा का ढाँचा बताते हैं: वह संवाद जिसमें याज्ञवल्क्य ने यह कथा मुनि भरद्वाज को सुनाई। शम्भु ने पहले यह चरित रचा और उमा को सुनाया। शिव ने इसे काकभुशुण्डि को दिया, उन्हें रामभक्ति का अधिकारी जानकर, और उनसे याज्ञवल्क्य ने पाकर भरद्वाज को सुनाया। ये श्रोता और वक्ता समदर्शी हैं, हरिलीला जानते हैं और तीनों कालों को हथेली के आँवले की तरह देखते हैं। दोहों में तुलसीदास कहते हैं कि उन्होंने यह कथा अपने गुरु से सूकरखेत में सुनी, पर बचपन में अचेत होने से समझ न सके। वक्ता ज्ञान के भण्डार थे और कथा गूढ़, तो कलि से ग्रसित जड़ जीव उसे कैसे समझता?

30.1

जागबलिक जो कथा सुहाई । भरद्वाज मुनिबरहि सुनाई ॥
कहिहउँ सोइ सम्बाद बखानी । सुनहु सकल सज्जन सुख मानी ॥

jāgabalika jo kathā suhāī | bharadvāja munibarahi sunāī ||
kahihaum̐ soi sambāda bakhānī | sunahu sakala sajjana sukha mānī ||

30.2

सम्भु कीन्ह यह चरित सुहावा । बहुरि कृपा करि उमहि सुनावा ॥
सोइ सिव कागभुसुंडिहि दीन्हा । रामभगति अधिकारी चीन्हा ॥

sambhu kīnha yaha carita suhāvā | bahuri kṛpā kari umahi sunāvā ||
soi siva kāgabhusuṃḍihi dīnhā | rāmabhagati adhikārī cīnhā ||

30.3

तेहि सन जागबलिक पुनि पावा । तिन्ह पुनि भरद्वाज प्रति गावा ॥
ते श्रोता बकता सम सीला । सवँदरसी जानहिँ हरिलीला ॥

tehi sana jāgabalika puni pāvā | tinha puni bharadvāja prati gāvā ||
te śrotā bakatā sama sīlā | savam̐darasī jānahim̐ harilīlā ||

30.4

जानहिँ तीनि काल निज-ज्ञाना । करतल गत आमलक समाना ॥
औरउ जे हरिभगत सुजाना । कहहिँ सुनहिँ समुझहिँ विधि नाना ॥

jānahim̐ tīni kāla nija-jñānā | karatala gata āmalaka samānā ||
aurau je haribhagata sujānā | kahahim̐ sunahim̐ samujhahim̐ vidhi nānā ||

दो॰ 30 (क)दोहा

मैं पुनि निज गुर सन सुनी, कथा सो सूकरखेत ।
समुझी नहिँ तसि बालपन, तब अति रहेउँ अचेत ॥

maiṃ puni nija gura sana sunī, kathā so sūkarakheta |
samujhī nahim̐ tasi bālapana, taba ati raheum̐ aceta ||

दो॰ 30 (ख)दोहा

सीता बकता ज्ञान-निधि, कथा राम के गूढ़ ।
किमि समुझौं में जीव जड़, कलि मल ग्रसित-बिमूढ़ ॥

sītā bakatā jñāna-nidhi, kathā rāma ke gūr̤ha |
kimi samujhauṃ meṃ jīva jar̤a, kali mala grasita-bimūr̤ha ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0