बालकाण्ड

अध्याय 308: दशरथ पुत्रों को हृदय से लगाते हैं

5 श्लोक · 308 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

दशरथ पुत्रों को हृदय से लगाते हैं

राजा ने मुनि को दण्डवत की और बार बार उनके चरणों की धूल सिर पर रखी। कौशिक ने राजा को हृदय से लगाकर आशीर्वाद दिया। फिर दोनों भाइयों को दण्डवत करते देख राजा के हृदय में सुख नहीं समाया। पुत्रों को छाती से लगाकर उन्होंने अपना असह्य दुःख मिटाया, मानो मृत शरीर को प्राण मिल गए हों। फिर उन्होंने वसिष्ठ के चरणों में सिर नवाया और मुनिश्रेष्ठ ने प्रेम से आनन्दित होकर उन्हें हृदय से लगाया। दोनों भाइयों ने ब्राह्मणों की वन्दना की और मनचाहे आशीर्वाद पाए। भरत ने छोटे भाई सहित प्रणाम किया तो श्रीराम ने उन्हें उठाकर हृदय से लगा लिया। लक्ष्मण भी प्रेम से भरकर उनसे मिले। फिर परम कृपालु और विनीत प्रभु पुरवासी, परिवार, जाति के लोग, याचक, मन्त्री और मित्र, सबसे यथायोग्य मिले।

308.1

मुनिहि दंडवत कीन्ह महीसा । बार बार पद-रज धरि सीसा ॥
कौसिक राउ लिये उर लाई । कहि असीस पूछी कुसलाई ॥

munihi daṃḍavata kīnha mahīsā | bāra bāra pada-raja dhari sīsā ||
kausika rāu liye ura lāī | kahi asīsa pūchī kusalāī ||

308.2

पुनि दंडवत करत दोउ भाई । देखि नृपति उर सुख न समाई ॥
सुत हियँ लाइ दुसह दुख मेटे । मृतक-सरीर प्रान जनु भेँटे ॥

puni daṃḍavata karata dou bhāī | dekhi nṛpati ura sukha na samāī ||
suta hiyam̐ lāi dusaha dukha meṭe | mṛtaka-sarīra prāna janu bhem̐ṭe ||

308.3

पुनि बसिष्ठ पद सिर तिन्ह नाये । प्रेम मुदित मुनिवर उर लाये ॥
बिप्र-बृन्द बन्दे दुहुँ भाईं । मन भावती असीसें पाईं ॥

puni basiṣṭha pada sira tinha nāye | prema mudita munivara ura lāye ||
bipra-bṛnda bande duhum̐ bhāīṃ | mana bhāvatī asīseṃ pāīṃ ||

308.4

भरत सहानुज कीन्ह प्रनामा । लिये उठाइ लाइ उर रामा ॥
हरषे लखन देखि दोउ भ्राता । मिले प्रेम-परिपूरित-गाता ॥

bharata sahānuja kīnha pranāmā | liye uṭhāi lāi ura rāmā ||
haraṣe lakhana dekhi dou bhrātā | mile prema-paripūrita-gātā ||

दो॰ 308दोहा

पुरजन परिजन जातिजन, जाचक मन्त्री मीत ।
मिले जथाविधि सबहि प्रभु, परम कृपाल बिनीत ॥

purajana parijana jātijana, jācaka mantrī mīta |
mile jathāvidhi sabahi prabhu, parama kṛpāla binīta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0