बालकाण्ड

अध्याय 307: राम लक्ष्मण पिता से मिलने चलते हैं

5 श्लोक · 307 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

राम लक्ष्मण पिता से मिलने चलते हैं

बारातियों ने अपने अपने डेरे देखे, जहाँ देवताओं के सब सुख सब प्रकार सुलभ थे। इस वैभव का भेद कोई नहीं जान सका, सब जनक की बड़ाई करते हैं। श्रीराम ने इसे सीताजी की महिमा जाना और कारण पहचानकर मन में हर्षित हुए। पिता का आगमन सुनकर दोनों भाइयों के हृदय में आनन्द समाता नहीं, पर संकोच के कारण गुरु से कह नहीं सकते; मन में पिता के दर्शन की लालसा है। उनकी विनम्रता देखकर विश्वामित्र सन्तुष्ट हुए। उन्होंने हर्षित होकर दोनों भाइयों को हृदय से लगाया। वे उन्हें लेकर दशरथ के जनवासे को चले, मानो सरोवर स्वयं प्यासे की ओर चला हो। पुत्रों सहित मुनि को आते देख राजा हर्ष से उठे और सुख के समुद्र में मानो थाह लेते हुए आगे बढ़े।

307.1

निज निज बास बिलोकि बराती । सुर-सुख-सकल सुलभ सब भाँती ॥
बिभव-भेद कछु कोउ न जाना । सकल जनक कर करहिं बखाना ॥

nija nija bāsa biloki barātī | sura-sukha-sakala sulabha saba bhām̐tī ||
bibhava-bheda kachu kou na jānā | sakala janaka kara karahiṃ bakhānā ||

307.2

सिय महिमा रघुनायक जानी । हरषे हृदयँ हेतु पहिचानी ॥
पितु आगमन सुनत दोउ भाई । हृदयँ न अति आनन्द अमाई ॥

siya mahimā raghunāyaka jānī | haraṣe hṛdayam̐ hetu pahicānī ||
pitu āgamana sunata dou bhāī | hṛdayam̐ na ati ānanda amāī ||

307.3

सकुचन्ह कहि न सकत गुरु पाहीँ । पितु-दरसन लालच मन माहीँ ॥
बिस्वामित्र बिनय बड़ि देखी । उपजा उर सन्तोष बिसेखी ॥

sakucanha kahi na sakata guru pāhīm̐ | pitu-darasana lālaca mana māhīm̐ ||
bisvāmitra binaya bar̤i dekhī | upajā ura santoṣa bisekhī ||

307.4

हरषि बन्धु दोउ हृदयँ लगाये । पुलक-अङ्ग अम्बक जल छाये ॥
चले जहाँ दसरथ जनवासे । मनहुँ सरोवर तकेउ पिआसे ॥

haraṣi bandhu dou hṛdayam̐ lagāye | pulaka-aṅga ambaka jala chāye ||
cale jahām̐ dasaratha janavāse | manahum̐ sarovara takeu piāse ||

दो॰ 307दोहा

भूप बिलोके जबहिँ मुनि, आवत सुतन्ह समेत ।
उठे हरषि सुख-सिन्धु महँ, चले थाह सी लेत ॥

bhūpa biloke jabahim̐ muni, āvata sutanha sameta |
uṭhe haraṣi sukha-sindhu maham̐, cale thāha sī leta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0