अध्याय 305: भेंट की सामग्री, आनन्द के दो समुद्रों का मिलन
5 श्लोक · 305 में से 361
इस अध्याय में क्या होता है
भेंट की सामग्री, आनन्द के दो समुद्रों का मिलन
सोने के कलश, सुन्दर परातें, थाल और अनेक प्रकार के सुन्दर बर्तन अमृत जैसे पकवानों से भरे हैं, जिनकी भाँति भाँति का वर्णन नहीं हो सकता। राजा जनक ने हर्षित होकर भेंट के लिए अनेक सुन्दर वस्तुएँ भेजीं: आभूषण, वस्त्र, अनेक महामणियाँ, पक्षी, हिरन, घोड़े, हाथी और अनेक प्रकार की सवारियाँ। बहुत से मंगल और सुगन्धित पदार्थ भी भेजे। दही, चिउड़ा और अपार उपहार काँवरों में भर भरकर कहार चले। अगवानी वालों ने जब बारात देखी, उनके हृदय में आनन्द भर गया और शरीर पुलकित हो गए। अगवानों को सजधज के साथ देखकर बारातियों ने भी प्रसन्न होकर नगाड़े बजाए। आपस में मिलने के लिए दोनों ओर से कुछ लोग हर्षित होकर बाग छोड़कर दौड़े, मानो आनन्द के दो समुद्र मर्यादा छोड़कर मिल रहे हों।