बालकाण्ड

अध्याय 304: शकुन नाच उठे, मार्ग में जनक का सत्कार

5 श्लोक · 304 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

शकुन नाच उठे, मार्ग में जनक का सत्कार

जिसके पुत्र सगुण ब्रह्म हैं, उसके लिए सब मंगल शकुन सहज हैं। राम जैसे दूल्हा, सीता जैसी दुलहिन और दशरथ तथा जनक जैसे पवित्र समधी; ऐसा विवाह सुनकर सब शकुन नाच उठे कि अब ब्रह्मा ने हमें सच्चा कर दिया। इस प्रकार बारात चली, घोड़े और हाथी गरजते और नगाड़े बजते रहे। सूर्यकुल के ध्वज श्रीराम के पिता को आता जानकर जनक ने नदियों पर पुल बँधवाए और बीच बीच में सुन्दर डेरे बनवाए, जिनमें देवलोक जैसी सम्पदा भरी थी। भोजन, शय्या और सुन्दर वस्त्र सबको अपनी रुचि के अनुसार मिलते हैं। नित्य नया अनुकूल सुख देखकर सब बाराती अपने घर भूल गए। सुन्दर बारात को आती जानकर और नगाड़ों की धूम सुनकर अगवानी करने वाले हाथी, रथ, पैदल और घोड़े सजाकर उसे लेने चले।

304.1

मङ्गल सगुन सुगम सब ताकें । सगुन-ब्रह्म सुन्दर सुत जा के ॥
राम सरिस बर दुलहिनि सीता । समधी दसरथ जनक पुनीता ॥

maṅgala saguna sugama saba tākeṃ | saguna-brahma sundara suta jā ke ||
rāma sarisa bara dulahini sītā | samadhī dasaratha janaka punītā ||

304.2

सुनि अस ब्याह सगुन सब नाचे । अब कीन्हे बिरञ्चि हम साँचे ॥
एहि बिधि कीन्ह बरात पयाना । हय गय गाजहिं हने निसाना ॥

suni asa byāha saguna saba nāce | aba kīnhe birañci hama sām̐ce ||
ehi bidhi kīnha barāta payānā | haya gaya gājahiṃ hane nisānā ||

304.3

आवत जानि भानुकुल-केतू । सरितन्हि जनक बँधाये सेतू ॥
बीच बीच बर बास बनाये । सुरपुर-सरिस सम्पदा छाये ॥

āvata jāni bhānukula-ketū | saritanhi janaka bam̐dhāye setū ||
bīca bīca bara bāsa banāye | surapura-sarisa sampadā chāye ||

304.4

असन सयन बर बसन सुहाए । पावहिँ सब निज निज मन भाये ॥
नित नूतन सुख लखि अनुकूले । सकल बरातिन्ह मन्दिर भूले ॥

asana sayana bara basana suhāe | pāvahim̐ saba nija nija mana bhāye ||
nita nūtana sukha lakhi anukūle | sakala barātinha mandira bhūle ||

दो॰ 304दोहा

आवत जानि बरात बर, सुनि गहगहे निसान ।
सजि गज रथ पदचर तुरग, लेन चले अगवान ॥

āvata jāni barāta bara, suni gahagahe nisāna |
saji gaja ratha padacara turaga, lena cale agavāna ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0