बालकाण्ड

अध्याय 299: नगर के बाहर रथ जुटते हैं

5 श्लोक · 299 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

नगर के बाहर रथ जुटते हैं

रण में कठोर, विरुद बाँधे हुए वीर निकलकर नगर के बाहर आ खड़े हुए। वे चतुर घोड़ों को अनेक चालों में फेरते हैं और नगाड़ों और शंखों की ध्वनि सुनकर हर्षित होते हैं। सारथियों ने रथों को ध्वजा, पताका, मणि और आभूषणों से विचित्र सजाया। वे सूर्य के रथ की शोभा भी हर लेते हैं। अनगिनत श्यामकर्ण घोड़े थे, उन्हें सारथियों ने उन रथों में जोता; वे ऐसे सजे थे कि देखकर मुनियों का मन भी मोहित हो जाए। वे जल पर भी धरती की भाँति चलते हैं, वेग इतना है कि टाप नहीं डूबती। अस्त्र शस्त्र और सब साज सजाकर सारथियों ने रथियों को बुलाया। रथों पर चढ़ चढ़कर नगर के बाहर बारात जुटने लगी; जो जिस काम को जाता है, उसे सुन्दर शकुन होते हैं।

299.1

बाँधे बिरद बीर रन गाढ़े । निकसि भये पुर बाहेर ठाढ़े ॥
फेरहिं चतुर तुरग गति नाना । हरषे सुनि सुनि पवन निसाना ॥

bām̐dhe birada bīra rana gār̤he | nikasi bhaye pura bāhera ṭhār̤he ||
pherahiṃ catura turaga gati nānā | haraṣe suni suni pavana nisānā ||

299.2

रथ सारथिन्ह बिचित्र बनाये । ध्वज पताक मनि भूषन लाये ॥
चवँर चारु किंकिन धुनि करहीं । भानु-जान सोभा अपहरहीं ॥

ratha sārathinha bicitra banāye | dhvaja patāka mani bhūṣana lāye ||
cavam̐ra cāru kiṃkina dhuni karahīṃ | bhānu-jāna sobhā apaharahīṃ ||

299.3

सावँकरन अगनित हय होते । ते तिन्ह रथन्ह सारथिन्ह जोते ॥
सुन्दर सकल अलंकृत सोहे । जिन्हहिँ बिलोकत मुनि मन मोहे ॥

sāvam̐karana aganita haya hote | te tinha rathanha sārathinha jote ||
sundara sakala alaṃkṛta sohe | jinhahim̐ bilokata muni mana mohe ||

299.4

जे जल चलहिँ थलहि की नाई । टाप न बूड़ बेग अधिकाई ॥
अस्त्र सत्र सब साज बनाई । रथी सारथिन्ह लिये बोलाई ॥

je jala calahim̐ thalahi kī nāī | ṭāpa na būr̤a bega adhikāī ||
astra satra saba sāja banāī | rathī sārathinha liye bolāī ||

दो॰ 299दोहा

चढ़ि चढ़ि रथ बाहेर नगर, लागी जुरन बरात ।
होत सगुन सुन्दर सबहि, जो जेहि कारज जात ॥

car̤hi car̤hi ratha bāhera nagara, lāgī jurana barāta |
hota saguna sundara sabahi, jo jehi kāraja jāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0