जहाँ तहाँ बिजली सी चमकती स्त्रियाँ सोलहों शृंगार करके झुण्ड के झुण्ड मिल रही हैं। वे चन्द्रमुखी और हिरनी के बच्चे जैसी आँखों वाली हैं, अपने रूप से रति का भी मान छुड़ाने वाली। वे मधुर वाणी में मंगलगीत गाती हैं जिनका कलरव सुनकर कोयल भी लजा जाती है। राजमहल का वर्णन कैसे हो, जहाँ विश्व को मोहने वाला मण्डप रचा गया है। कहीं भाट विरुदावली गाते हैं, कहीं ब्राह्मण वेदध्वनि करते हैं। स्त्रियाँ राम और सीता का नाम ले लेकर सुन्दर मंगलगीत गाती हैं। उत्साह बहुत है और भवन छोटा, मानो वह उमड़कर चारों ओर बह चला हो। दशरथ के भवन की शोभा कौन कवि कह सकता है, जहाँ सब देवताओं के शिरोमणि श्रीराम ने अवतार लिया।