बालकाण्ड

अध्याय 297: दशरथ के महल में सीताराम के मंगलगीत

5 श्लोक · 297 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

दशरथ के महल में सीताराम के मंगलगीत

जहाँ तहाँ बिजली सी चमकती स्त्रियाँ सोलहों शृंगार करके झुण्ड के झुण्ड मिल रही हैं। वे चन्द्रमुखी और हिरनी के बच्चे जैसी आँखों वाली हैं, अपने रूप से रति का भी मान छुड़ाने वाली। वे मधुर वाणी में मंगलगीत गाती हैं जिनका कलरव सुनकर कोयल भी लजा जाती है। राजमहल का वर्णन कैसे हो, जहाँ विश्व को मोहने वाला मण्डप रचा गया है। कहीं भाट विरुदावली गाते हैं, कहीं ब्राह्मण वेदध्वनि करते हैं। स्त्रियाँ राम और सीता का नाम ले लेकर सुन्दर मंगलगीत गाती हैं। उत्साह बहुत है और भवन छोटा, मानो वह उमड़कर चारों ओर बह चला हो। दशरथ के भवन की शोभा कौन कवि कह सकता है, जहाँ सब देवताओं के शिरोमणि श्रीराम ने अवतार लिया।

297.1

जहँ तहँ जूथ जूथ मिलि भामिनि । सजि नव सप्त सकल दुति दामिनि ॥
बिधुबदनीं मृग-सावक-लोचनि । निज-सरूप रति-मान-बिमोचनि ॥

jaham̐ taham̐ jūtha jūtha mili bhāmini | saji nava sapta sakala duti dāmini ||
bidhubadanīṃ mṛga-sāvaka-locani | nija-sarūpa rati-māna-bimocani ||

297.2

गावहिँ मङ्गल मञ्जुल बानीं । सुनि कल-रव कलकंठि लजानीं ॥
भूप भवन किमि जाइ बखाना । बिस्व-बिमोहन रचेउ बिताना ॥

gāvahim̐ maṅgala mañjula bānīṃ | suni kala-rava kalakaṃṭhi lajānīṃ ||
bhūpa bhavana kimi jāi bakhānā | bisva-bimohana raceu bitānā ||

297.3

मङ्गल-द्रव्य मनोहर नाना । राजत बाजत बिपुल निसाना ॥
कतहुँ बिरद बन्दी उच्चरहीं । कतहुँ बेद धुनि भूसुर करहीँ ॥

maṅgala-dravya manohara nānā | rājata bājata bipula nisānā ||
katahum̐ birada bandī uccarahīṃ | katahum̐ beda dhuni bhūsura karahīm̐ ||

297.4

गावहिँ सुन्दर मङ्गल गीता । लै लै नाम राम अरु सीता ॥
बहुत उछाह भवन अति थोरा । मानहुँ उमगि चला चहुँ ओरा ॥

gāvahim̐ sundara maṅgala gītā | lai lai nāma rāma aru sītā ||
bahuta uchāha bhavana ati thorā | mānahum̐ umagi calā cahum̐ orā ||

दो॰ 297दोहा

सोभा दसरथ भवन के, को कबि बरनइ पार ।
जहाँ सकल-सुर-सीस-मनि, राम लीन्ह अवतार ॥

sobhā dasaratha bhavana ke, ko kabi baranai pāra |
jahām̐ sakala-sura-sīsa-mani, rāma līnha avatāra ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0