बालकाण्ड

अध्याय 296: विवाह के लिए अयोध्या का शृंगार

5 श्लोक · 296 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

विवाह के लिए अयोध्या का शृंगार

याचक तरह तरह के वस्त्र पहनकर गुण गाते चले और हर्ष से नगाड़े जोर से बजने लगे। सब लोगों को समाचार मिला और घर घर बधाइयाँ होने लगीं। जनकसुता और रघुवीर के विवाह से चौदहों भुवनों में उत्साह भर गया। शुभ कथा सुनकर लोग प्रेम में भरकर मार्ग, घर और गलियाँ सजाने लगे। यद्यपि अवध सदा ही सुहावनी है, श्रीराम की मंगलमयी पावन पुरी है, तो भी प्रीति की अपनी सुन्दर रीति है, इसलिए नई मंगल रचना की गई। बाजार ध्वजा, पताका, परदों और सुन्दर चँवरों से छा गया। सोने के कलश, तोरण, मणियों की झालरें, हल्दी, दूब, दही, अक्षत और मालाएँ सजाई गईं। लोगों ने अपने अपने घर मंगलमय बना लिए, गलियाँ सुगन्धित जल से सींचीं और चौकों में सुन्दर चौक पूरे।

296.1

कहत चले पहिरें पट नाना । हरषि हने गहगहे निसाना ॥
समाचार सब लोगन्ह पाये । लागे घर घर होने बधाये ॥

kahata cale pahireṃ paṭa nānā | haraṣi hane gahagahe nisānā ||
samācāra saba loganha pāye | lāge ghara ghara hone badhāye ||

296.2

भुवन चारि-दस भरा उछाहू । जनकसुता-रघुबीर बिआहू ॥
सुनि सुभ कथा लोग अनुरागे । मग-गृह-गलीं सँवारन लागे ॥

bhuvana cāri-dasa bharā uchāhū | janakasutā-raghubīra biāhū ||
suni subha kathā loga anurāge | maga-gṛha-galīṃ sam̐vārana lāge ||

296.3

जद्यपि अवध सदैव सुहावनि । रामपुरी मङ्गल-मय पावनि ॥
तदपि प्रीति कै रीति सुहाई । मङ्गल-रचना रची बनाई ॥

jadyapi avadha sadaiva suhāvani | rāmapurī maṅgala-maya pāvani ||
tadapi prīti kai rīti suhāī | maṅgala-racanā racī banāī ||

296.4

ध्वज पताक पट चामर चारु । छावा परम-विचित्र बजारू ॥
कनक कलस तोरन मनि-जाला । हरद दूब दधि अच्छत माला ॥

dhvaja patāka paṭa cāmara cāru | chāvā parama-vicitra bajārū ||
kanaka kalasa torana mani-jālā | harada dūba dadhi acchata mālā ||

दो॰ 296दोहा

मङ्गल भय निज निज भवन, लोगन्ह रचे बनाइ ।
बीथीं साँची चतुरसम, चौकें चारु पुराइ ॥

maṅgala bhaya nija nija bhavana, loganha race banāi |
bīthīṃ sām̐cī caturasama, caukeṃ cāru purāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0