सुनि बोले गुरु अति सुख पाई । पुन्य-पुरुष कहँ महि सुख छाई ॥
जिमि सरिता सागर मह जाहीँ । जद्यपि ताहि कामना नाहीं ॥
suni bole guru ati sukha pāī | punya-puruṣa kaham̐ mahi sukha chāī ||
jimi saritā sāgara maha jāhīm̐ | jadyapi tāhi kāmanā nāhīṃ ||
5 श्लोक · 294 में से 361
यह सुनकर गुरु वसिष्ठ बहुत सुखी होकर बोले: पुण्यात्मा पुरुष के लिए पृथ्वी सुख से भर जाती है। जैसे नदियाँ समुद्र में जाती हैं, यद्यपि समुद्र को उनकी कामना नहीं, वैसे ही सुख और सम्पत्ति बिना बुलाए धर्मशील के पास स्वभाव से जाते हैं। तुम गुरु, ब्राह्मण, गौ और देवताओं की सेवा करने वाले हो और कौसल्या देवी भी वैसी ही पवित्र हैं। तुम्हारे समान पुण्यवान संसार में न हुआ, न है, न होगा। राजन, जिसके राम जैसा पुत्र हो, उससे अधिक पुण्य किसका? तुम्हारे चारों पुत्र वीर, विनीत, धर्मव्रती और गुणों के सागर हैं; तुम्हारा सब काल में कल्याण है। नगाड़े बजवाकर बारात सजाओ और शीघ्र चलो। राजा ने सिर नवाकर कहा, बहुत अच्छा, नाथ; और दूतों को ठहरवाकर महल को गए।
सुनि बोले गुरु अति सुख पाई । पुन्य-पुरुष कहँ महि सुख छाई ॥
जिमि सरिता सागर मह जाहीँ । जद्यपि ताहि कामना नाहीं ॥
suni bole guru ati sukha pāī | punya-puruṣa kaham̐ mahi sukha chāī ||
jimi saritā sāgara maha jāhīm̐ | jadyapi tāhi kāmanā nāhīṃ ||
तिमि सुख सम्पति बिनहिँ बोलाये । धरमसील पहिँ जाहिँ सुभाये ॥
तुम्ह गुरु-विप्र-धेनु-सुर सेबी । तसि पुनीत कौसल्या देबी ॥
timi sukha sampati binahim̐ bolāye | dharamasīla pahim̐ jāhim̐ subhāye ||
tumha guru-vipra-dhenu-sura sebī | tasi punīta kausalyā debī ||
सुकृती तुम्ह समान जग माहीं । भयउ न है कोउ होनेउँ नाहीं ॥
तुम्ह से अधिक पुन्य बड़ का के । राजन राम सरिस सुत जा के ॥
sukṛtī tumha samāna jaga māhīṃ | bhayau na hai kou honeum̐ nāhīṃ ||
tumha se adhika punya bar̤a kā ke | rājana rāma sarisa suta jā ke ||
बीर बिनीत धरम-व्रत धारी । गुन-सागर बर बालक चारी ॥
तुम्ह कह सर्व काल कल्याना । सजहु बरात बजाइ निसाना ॥
bīra binīta dharama-vrata dhārī | guna-sāgara bara bālaka cārī ||
tumha kaha sarva kāla kalyānā | sajahu barāta bajāi nisānā ||
चलहु बेगि सुनि गुरु बचन, भलेहिं नाथ सिर नाइ ।
भूपति गवने भवन तब, दूतन्ह बास देवाइ ॥
calahu begi suni guru bacana, bhalehiṃ nātha sira nāi |
bhūpati gavane bhavana taba, dūtanha bāsa devāi ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0