बालकाण्ड

अध्याय 295: रानियाँ शुभ समाचार सुनती हैं

5 श्लोक · 295 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

रानियाँ शुभ समाचार सुनती हैं

राजा ने सारे रनिवास को बुलाकर जनक की पत्रिका पढ़कर सुनाई। सन्देश सुनकर सब रानियाँ हर्षित हुईं और राजा ने बाकी सारी कथा कही। प्रेम से प्रफुल्लित रानियाँ ऐसी शोभित हुईं जैसे बादलों की गर्जना सुनकर मोरनियाँ। गुरुपत्नी और बड़ी स्त्रियाँ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देती हैं और माताएँ आनन्द में डूब गईं। वे वह अति प्रिय पाती एक दूसरे से लेकर हृदय से लगाती हैं और छाती ठंडी करती हैं। राजा बार बार राम और लक्ष्मण की कीर्ति और करनी का वर्णन करते हैं। सब मुनि की कृपा है, यह कहकर वे बाहर गए। तब रानियों ने ब्राह्मणों को बुलाकर आनन्द से दान दिए और श्रेष्ठ ब्राह्मण आशीष देते चले। याचकों को बुलाकर करोड़ों प्रकार की निछावर दी गई; वे कहते गए, चक्रवर्ती दशरथ के चारों पुत्र चिरंजीवी हों।

295.1

राजा सब रनिवास बोलाई । जनक-पत्रिका बाचि सुनाई ॥
सुनि सन्देस सकल हरषानीं । अपर कथा सब भूप बखानीं ॥

rājā saba ranivāsa bolāī | janaka-patrikā bāci sunāī ||
suni sandesa sakala haraṣānīṃ | apara kathā saba bhūpa bakhānīṃ ||

295.2

प्रेम-प्रफुल्लित राजहिँ रानी । मनहुँ सिखिनि सुनि बारिद बनी ॥
मुदित असीस देहिँ गुरु नारीं । अति आनन्द मगन महतारीं ॥

prema-praphullita rājahim̐ rānī | manahum̐ sikhini suni bārida banī ||
mudita asīsa dehim̐ guru nārīṃ | ati ānanda magana mahatārīṃ ||

295.3

लेहिँ परसपर अति प्रिय पाती । हृदयँ लगाइ जुड़ावहिँ छाती ॥
राम लखन के कीरति करनी । बारहिँ बार भूप-बर बरनी ॥

lehim̐ parasapara ati priya pātī | hṛdayam̐ lagāi jur̤āvahim̐ chātī ||
rāma lakhana ke kīrati karanī | bārahim̐ bāra bhūpa-bara baranī ||

295.4

मुनि प्रसाद कहि द्वार सिधाये । रानिन्ह तब महिदेव बोलाये ॥
दिये दान आनन्द समेता । चले विप्र-बर आसिष देता ॥

muni prasāda kahi dvāra sidhāye | rāninha taba mahideva bolāye ||
diye dāna ānanda sametā | cale vipra-bara āsiṣa detā ||

295.सो॰ 295सोरठा

जाचक लिये हँकारि, दीन्हि निछावरि कोटि बिधि ।
चिरजीवहु सुत चारि, चक्रबर्ति दसरत्थ के ॥

jācaka liye ham̐kāri, dīnhi nichāvari koṭi bidhi |
cirajīvahu suta cāri, cakrabarti dasarattha ke ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0