बालकाण्ड

अध्याय 29: राम भूल भूलते हैं, प्रेम याद रखते हैं

7 श्लोक · 29 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

राम भूल भूलते हैं, प्रेम याद रखते हैं

तुलसीदास अपनी ढिठाई को बड़ा दोष कहते हैं, जिनके पाप सुनकर नरक भी नाक सिकोड़ ले। फिर भी राम ने उनके डर पर ध्यान न देकर उनकी भक्ति सराही। मन अच्छा हो तो कहने से दोष मिट जाता है, क्योंकि राम भक्त का मन जानते हैं। प्रभु किसी की चूक याद नहीं रखते, पर उसकी भलाई सौ बार याद करते हैं। जिस पाप के कारण उन्होंने बालि को मारा, वही कुचाल फिर सुग्रीव ने की, और विभीषण ने भी, पर राम ने उस ओर देखा तक नहीं, भरत से मिलते समय उनका सम्मान किया और राजसभा में उनकी प्रशंसा की। दोहे कहते हैं कि प्रभु पेड़ के नीचे और वानर डाल पर, फिर भी उन्हें अपने समान बना लिया। राम जैसा शीलनिधान स्वामी कहीं नहीं।

29.1

अति बड़ि मोरि ढिठाई खोरी । सुनि अघ नरकहुँ नाक सकोरी ॥
समुझि सहम मोहि अपडर अपनें । सो सुधि राम कीन्ह नहिं सपनें ॥

ati bar̤i mori ḍhiṭhāī khorī | suni agha narakahum̐ nāka sakorī ||
samujhi sahama mohi apaḍara apaneṃ | so sudhi rāma kīnha nahiṃ sapaneṃ ||

29.2

सुनि अवलोकि सुचित चख चाही । भगति मोरि मति स्वामि सराही ॥
कहत नसाइ होइ हियँ नीकी । रीझत राम जानि जन जी की ॥

suni avaloki sucita cakha cāhī | bhagati mori mati svāmi sarāhī ||
kahata nasāi hoi hiyam̐ nīkī | rījhata rāma jāni jana jī kī ||

29.3

रहति न प्रभु चित चूक किये की । करत सुरति सय बार हिये की ॥
जेहिं अघ बधेउ ब्याध इव बाली । फिरि सुकंठ सोइ कीन्हि कुचाली ॥

rahati na prabhu cita cūka kiye kī | karata surati saya bāra hiye kī ||
jehiṃ agha badheu byādha iva bālī | phiri sukaṃṭha soi kīnhi kucālī ||

29.4

सोइ करतूति बिभीषन केरी । सपनेहुँ सो न राम हियँ हेरी ॥
ते भरतहि भेँटत सनमाने । राज-सभा रघुबीर बखाने ॥

soi karatūti bibhīṣana kerī | sapanehum̐ so na rāma hiyam̐ herī ||
te bharatahi bhem̐ṭata sanamāne | rāja-sabhā raghubīra bakhāne ||

दो॰ 29 (क)दोहा

प्रभु तरु तर कपि डार पर, ते किए आपु समान ।
तुलसी कहूँ न राम से, साहिब सील-निधान ॥

prabhu taru tara kapi ḍāra para, te kie āpu samāna |
tulasī kahūm̐ na rāma se, sāhiba sīla-nidhāna ||

दो॰ 29 (ख)दोहा

राम निकाईं रावरी, है सबही को नीक ।
जौं यह साँची है सदा, तौ नीको तुलसीक ॥

rāma nikāīṃ rāvarī, hai sabahī ko nīka |
jauṃ yaha sām̐cī hai sadā, tau nīko tulasīka ||

दो॰ 29 (ग)दोहा

एहि बिधि निज गुन दोष कहि, सबहि बहुरि सिर नाइ ।
बरनउँ रघुबर-बिसद-जस, सुनि कलि कलुष नसाइ ॥

ehi bidhi nija guna doṣa kahi, sabahi bahuri sira nāi |
baranaum̐ raghubara-bisada-jasa, suni kali kaluṣa nasāi ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0