बालकाण्ड

अध्याय 288: मणियों के बाँस, पक्षी और बन्दनवार

5 श्लोक · 288 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

मणियों के बाँस, पक्षी और बन्दनवार

कारीगरों ने हरी मणियों के बाँस बनाए, ऐसे सीधे और पत्तों वाले कि असली से पहचाने नहीं जाते। सोने की पान की बेलें बनाईं, जिनके पत्ते इतने सजीव कि पहचान में नहीं आते। उन्हीं से बन्धन बनाए और बीच बीच में मोतियों की लड़ियाँ लगाईं। माणिक, पन्ना, हीरा और फ़िरोज़ा को काटकर कमल रचे। भौंरे और पक्षी बनाए जो हवा चलने पर गूँजते और कूजते से लगते हैं। खम्भों पर देवताओं की मूर्तियाँ गढ़ीं, जो मंगल द्रव्य लिए खड़ी हैं। गजमुक्ताओं से अनेक प्रकार के चौक पूरे गए। नीलम को काटकर आम के पत्ते बनाए, सोने के बौर और पन्ने के गुच्छे रेशमी डोरियों में लटकाए।

288.1

बेनु हरित-मनि-मय सब कीन्हे । सरल सपरब परहिँ नहिं चीन्हे ॥
कनक कलित अहिबेल बनाई । लखि नहिं परइ सपरन सुहाई ॥

benu harita-mani-maya saba kīnhe | sarala saparaba parahim̐ nahiṃ cīnhe ||
kanaka kalita ahibela banāī | lakhi nahiṃ parai saparana suhāī ||

288.2

तेहि के रचि पचि बन्ध बनाये । बिच बिच मुकता दाम सुहाए ॥
मानिक मरकत कुलिस पिरोजा । चीरि कोरि पचि रचे सरोजा ॥

tehi ke raci paci bandha banāye | bica bica mukatā dāma suhāe ||
mānika marakata kulisa pirojā | cīri kori paci race sarojā ||

288.3

किये भृङ्ग बहुरंग बिहङ्गा । गुञ्जहिँ कूजहिँ पवन प्रसङ्गा ॥
सुर-प्रतिमा खंभन गढ़ि काढ़ी । मङ्गल-द्रव्य लिये सब ठाढ़ी ॥

kiye bhṛṅga bahuraṃga bihaṅgā | guñjahim̐ kūjahim̐ pavana prasaṅgā ||
sura-pratimā khaṃbhana gar̤hi kār̤hī | maṅgala-dravya liye saba ṭhār̤hī ||

288.4

चौंकें भाँति अनेक पुराईं । सिन्धुर-मनि मय सहज सुहाई ॥

cauṃkeṃ bhām̐ti aneka purāīṃ | sindhura-mani maya sahaja suhāī ||

दो॰ 288दोहा

सौरभ-पल्लव सुभग सुठि, किये नीलमनि कोरि ।
हेम-बौर मरकत-धार, लसत पाट-मय डोरि ॥

saurabha-pallava subhaga suṭhi, kiye nīlamani kori |
hema-baura marakata-dhāra, lasata pāṭa-maya ḍori ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0