बालकाण्ड

अध्याय 284: विष्णु का धनुष और भ्रम का परदा हटना

5 श्लोक · 284 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

विष्णु का धनुष और भ्रम का परदा हटना

श्रीराम कहते हैं: देवता, दानव, राजा या योद्धा, बल में बराबर हो या अधिक, यदि कोई हमें रण में ललकारे तो हम सुख से लड़ेंगे, चाहे वह काल ही क्यों न हो। जो क्षत्रिय होकर युद्ध से डरे, वह कुल का कलंक और नीच है। रघुवंशी रण में काल से भी नहीं डरते। ब्राह्मणवंश की ऐसी महिमा है कि जो आपसे डरता है वह सबसे निर्भय हो जाता है। श्रीराम के कोमल और गूढ़ वचन सुनकर परशुराम की बुद्धि के परदे खुल गए। वे बोले: राम, रमापति का यह धनुष लो और खींचो, जिससे मेरा सन्देह मिटे। देते ही धनुष अपने आप श्रीराम के पास चला गया; परशुराम विस्मित हो गए। प्रभु का प्रभाव जानकर शरीर पुलकित हो गया और हाथ जोड़कर प्रेम से भरे वचन बोले।

284.1

देव दनुज भूपति भट नाना । सम बल अधिक होउ बलवाना ॥
जौँ रन हमहि पचारै कोऊ । लरहिँ सुखेन काल किन होऊ ॥

deva danuja bhūpati bhaṭa nānā | sama bala adhika hou balavānā ||
jaum̐ rana hamahi pacārai koū | larahim̐ sukhena kāla kina hoū ||

284.2

छत्रिय तनु धरि समर सकाना । कुल-कलङ्क तेहिं पावँर जाना ॥
कहउँ सुभाव न कुलहि प्रसंसी । कालहु डरहिं न रन रघुवंसी ॥

chatriya tanu dhari samara sakānā | kula-kalaṅka tehiṃ pāvam̐ra jānā ||
kahaum̐ subhāva na kulahi prasaṃsī | kālahu ḍarahiṃ na rana raghuvaṃsī ||

284.3

बिप्र-बस के असि प्रभुताई । अभय होइ जो तुम्हहिं डेराई ॥
सुनि मृदु गूढ़ बचन रघुपति के । उघरे पटल परसुधर-मति के ॥

bipra-basa ke asi prabhutāī | abhaya hoi jo tumhahiṃ ḍerāī ||
suni mṛdu gūr̤ha bacana raghupati ke | ughare paṭala parasudhara-mati ke ||

284.4

राम रमापति कर धनु लेहू । खैंचहु मिटै मोर सन्देहू ॥
देत चाप आपुहिं चलि गयऊ । परसुराम मन बिसमय भयऊ ॥

rāma ramāpati kara dhanu lehū | khaiṃcahu miṭai mora sandehū ||
deta cāpa āpuhiṃ cali gayaū | parasurāma mana bisamaya bhayaū ||

दो॰ 284दोहा

जाना राम प्रभाव तब, पुलक प्रफुल्लित गात ।
जोरि पानि बोले बचन, हृदय न प्रेम अमात ॥

jānā rāma prabhāva taba, pulaka praphullita gāta |
jori pāni bole bacana, hṛdaya na prema amāta ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0