बालकाण्ड

अध्याय 285: परशुराम की स्तुति और वन को प्रस्थान

5 श्लोक · 285 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

परशुराम की स्तुति और वन को प्रस्थान

परशुराम श्रीराम की जय गाते हैं: रघुवंश रूपी कमलवन के सूर्य, राक्षसकुल के घने वन को जलाने वाली अग्नि, आपकी जय हो; देवता, ब्राह्मण और गौ के हितकारी, मद, मोह, क्रोध और भ्रम हरने वाले, आपकी जय हो। महेश के मन रूपी मानसरोवर के हंस, एक मुख से आपकी प्रशंसा कैसे करूँ? अनजाने में मैंने बहुत अनुचित कहा, हे क्षमा के मन्दिर दोनों भाइयो, क्षमा करो। रघुकुलकेतु की जय जयकार करके परशुराम तप के लिए वन चले गए। कुटिल राजा अपने ही मन के भय से डर गए और कायर जहाँ तहाँ चुपके से भाग गए। देवताओं ने दुन्दुभियाँ बजाईं और प्रभु पर फूल बरसाए; जनकपुर के नर नारियों का भ्रम और भय मिट गया।

285.1

जय रघुबंस-बनज-बन-भानू । गहन-दनुज-कुल दहन-कृसानु ॥
जय सुर-बिप्र-धेनु-हितकारी । जय मद मोह-कोह-भ्रम-हारी ॥

jaya raghubaṃsa-banaja-bana-bhānū | gahana-danuja-kula dahana-kṛsānu ||
jaya sura-bipra-dhenu-hitakārī | jaya mada moha-koha-bhrama-hārī ||

285.2

बिनय-सील करुना-गुन सागर । जयति बचन-रचना अति नागर ॥
सेवक-सुखद सुभग सब अङ्गा । जय सरीर छबि कोटि अनङ्गा ॥

binaya-sīla karunā-guna sāgara | jayati bacana-racanā ati nāgara ||
sevaka-sukhada subhaga saba aṅgā | jaya sarīra chabi koṭi anaṅgā ||

285.3

करउँ काह मुख एक प्रसंसा । जय महेस मन मानस हंसा ॥
अनुचित बहुत कहेउँ अज्ञाता । छमहु छमामंदिर दोउ भ्राता ॥

karaum̐ kāha mukha eka prasaṃsā | jaya mahesa mana mānasa haṃsā ||
anucita bahuta kaheum̐ ajñātā | chamahu chamāmaṃdira dou bhrātā ||

285.4

कहि जय जय जय रघुकुलकेतू । भृगुपति गये बनहिँ तप-हेतू ॥
अपभयँ कुटिल महीप डेराने । जहँ तहँ कायर गँवहिं पराने ॥

kahi jaya jaya jaya raghukulaketū | bhṛgupati gaye banahim̐ tapa-hetū ||
apabhayam̐ kuṭila mahīpa ḍerāne | jaham̐ taham̐ kāyara gam̐vahiṃ parāne ||

दो॰ 285दोहा

देवन्ह दीन्हीँ दुंदुभीं, प्रभु पर बरषहिँ फूल ।
हरषे पुर-नर-नारि सब, मिटा मोह-मय-सूल ॥

devanha dīnhīm̐ duṃdubhīṃ, prabhu para baraṣahim̐ phūla |
haraṣe pura-nara-nāri saba, miṭā moha-maya-sūla ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0