बालकाण्ड

अध्याय 282: हमारे धनुष में एक गुण, आपमें नौ

5 श्लोक · 282 में से 361

इस अध्याय में क्या होता है

हमारे धनुष में एक गुण, आपमें नौ

श्रीराम कहते हैं: आपको फरसा और धनुषबाण धारण किए देख बालक ने वीर समझकर क्रोध किया; उसने आपका नाम जाना पर आपको पहचाना नहीं, अपने वंश के स्वभाव से उत्तर दिया। यदि आप मुनि की भाँति आते तो बालक आपकी चरणरज सिर पर धरता। अनजान की भूल क्षमा कीजिए, ब्राह्मण के हृदय में बहुत कृपा होनी चाहिए। नाथ, हमारी आपकी बराबरी कैसी? कहाँ चरण और कहाँ सिर! मेरा नाम केवल छोटा सा राम है, आपका नाम फरसे सहित बड़ा परशुराम है। हमारे धनुष में एक ही गुण है, उसकी डोरी; आपमें नौ परम पवित्र गुण हैं। हम हर प्रकार आपसे हारे हैं, हे विप्र, हमारे अपराध क्षमा कीजिए। बार बार मुनि और विप्र कहे जाने पर परशुराम रोष से हँसकर बोले: तू भी अपने भाई जैसा ही टेढ़ा है।

282.1

देखि कुठार बान-धनु-धारी । भइ लरिकहि रिस बीर बिचारी ॥
नाम जान पै तुम्हहिँ न चीन्हा । बंस सुभाउ उतर तेंहिं दीन्हा ॥

dekhi kuṭhāra bāna-dhanu-dhārī | bhai larikahi risa bīra bicārī ||
nāma jāna pai tumhahim̐ na cīnhā | baṃsa subhāu utara teṃhiṃ dīnhā ||

282.2

जौँ तुम्ह औतेहु मुनि की नाँई । पद-रज सिर सिसु धरत गोसाँई ॥
छमहु चूक अनजानत केरी । चहिय विप्र उर कृपा घनेरी ॥

jaum̐ tumha autehu muni kī nām̐ī | pada-raja sira sisu dharata gosām̐ī ||
chamahu cūka anajānata kerī | cahiya vipra ura kṛpā ghanerī ||

282.3

हमहि तुम्हहिँ सरिबरि कस नाथा । कहहु न कहाँ चरन कहँ माथा ॥
राम मात्र लघु नाम हमारा । परसु सहित बड़ नाम तुम्हारा ॥

hamahi tumhahim̐ saribari kasa nāthā | kahahu na kahām̐ carana kaham̐ māthā ||
rāma mātra laghu nāma hamārā | parasu sahita bar̤a nāma tumhārā ||

282.4

देव एक गुन धनुष हमारें । नव गुन परम-पुनीत तुम्हारें ॥
सब प्रकार हम तुम्ह सन हारे । छमहु बिप्र अपराध हमारे ॥

deva eka guna dhanuṣa hamāreṃ | nava guna parama-punīta tumhāreṃ ||
saba prakāra hama tumha sana hāre | chamahu bipra aparādha hamāre ||

दो॰ 282दोहा

बार बार मुनि बिप्र घर, कहा राम सन राम ।
बोले भृगुपति सरुष हसि, तहूँ बन्धु सम बाम ॥

bāra bāra muni bipra ghara, kahā rāma sana rāma |
bole bhṛgupati saruṣa hasi, tahūm̐ bandhu sama bāma ||

पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0