बन्धु कहइ कटु सम्मत तोरें । तू छल बिनय करसि कर जोरें ॥
करु परितोष मोर संग्रामा । नाहिँ त छाडु कहाउब रामा ॥
bandhu kahai kaṭu sammata toreṃ | tū chala binaya karasi kara joreṃ ||
karu paritoṣa mora saṃgrāmā | nāhim̐ ta chāḍu kahāuba rāmā ||
5 श्लोक · 281 में से 361
परशुराम श्रीराम से कहते हैं: तेरा भाई तेरी ही सम्मति से कड़वा बोलता है और तू छल से हाथ जोड़कर विनय करता है। युद्ध में मुझे सन्तुष्ट कर, नहीं तो राम कहलाना छोड़ दे। अरे शिवद्रोही, छल छोड़कर लड़, नहीं तो भाई सहित तुझे मारता हूँ। परशुराम फरसा उठाए बक रहे हैं और श्रीराम सिर झुकाए मन ही मन मुस्कुरा रहे हैं। वे सोचते हैं: अपराध लक्ष्मण का, क्रोध मुझ पर; कहीं कहीं सीधापन भी बड़ा दोष है, टेढ़े से सब डरते हैं, टेढ़े चन्द्रमा को राहु भी नहीं ग्रसता। फिर प्रकट कहते हैं: मुनीश्वर, क्रोध छोड़िए, आपके हाथ में फरसा है और आगे मेरा सिर। स्वामी और सेवक में युद्ध कैसा? बालक ने आपका वेष देखकर कुछ कह दिया, उसका दोष नहीं।
बन्धु कहइ कटु सम्मत तोरें । तू छल बिनय करसि कर जोरें ॥
करु परितोष मोर संग्रामा । नाहिँ त छाडु कहाउब रामा ॥
bandhu kahai kaṭu sammata toreṃ | tū chala binaya karasi kara joreṃ ||
karu paritoṣa mora saṃgrāmā | nāhim̐ ta chāḍu kahāuba rāmā ||
छल तजि करहि समर सिव-द्रोही । बन्धु सहित न त मारउँ तोही ॥
भृगुपति बकहिँ कुठार उठाये । मन मुसकाहिं राम सिर नाये ॥
chala taji karahi samara siva-drohī | bandhu sahita na ta māraum̐ tohī ||
bhṛgupati bakahim̐ kuṭhāra uṭhāye | mana musakāhiṃ rāma sira nāye ||
गुनहु लखन कर हम पर रोषू । कतहुँ सुधाइहु ते बड़ दोषू ॥
टेढ़ जानि सब बंदइ काहू । बक्र चन्द्रमहिँ ग्रसइ न राहू ॥
gunahu lakhana kara hama para roṣū | katahum̐ sudhāihu te bar̤a doṣū ||
ṭer̤ha jāni saba baṃdai kāhū | bakra candramahim̐ grasai na rāhū ||
राम कहेउ रिस तजिअ मुनीसा । कर कुठार आगें यह सीसा ॥
जेंहिं रिस जाइ करिय सोइ स्वामी । मोहि जानि आपन अनुगामी ॥
rāma kaheu risa tajia munīsā | kara kuṭhāra āgeṃ yaha sīsā ||
jeṃhiṃ risa jāi kariya soi svāmī | mohi jāni āpana anugāmī ||
प्रभुहि सेवकहि समर कस, तजहु विप्र-बर रोस ।
बेष बिलोकि कहेसि कछु, बालकहू नहिँ दोस ॥
prabhuhi sevakahi samara kasa, tajahu vipra-bara rosa |
beṣa biloki kahesi kachu, bālakahū nahim̐ dosa ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0