अति बिनीत मृदु सीतल बानी । बोले राम जोरि जुग पानी ॥
सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना । बालक बचन करिय नहिँ काना ॥
ati binīta mṛdu sītala bānī | bole rāma jori juga pānī ||
sunahu nātha tumha sahaja sujānā | bālaka bacana kariya nahim̐ kānā ||
5 श्लोक · 279 में से 361
दोनों हाथ जोड़कर श्रीराम अत्यन्त विनीत, कोमल और शीतल वाणी में बोले: नाथ, आप स्वभाव से ज्ञानी हैं, बालक की बात पर कान न दीजिए। बालक और बर्रे का एक सा स्वभाव होता है, विद्वान इन्हें कभी नहीं छेड़ते। इसने आपका कुछ नहीं बिगाड़ा, अपराधी तो मैं हूँ। कृपा, क्रोध, वध या बन्धन, जो करना हो मुझ पर दास की भाँति कीजिए; जल्दी बताइए जिस प्रकार आपका क्रोध जाए, मैं वही उपाय करूँ। परशुराम कहते हैं: राम, क्रोध कैसे जाए, तेरा भाई अब भी मुझे टेढ़ी दृष्टि से देख रहा है। यदि इसके गले पर फरसा नहीं चलाया तो मेरा क्रोध करना व्यर्थ हुआ। मेरे फरसे की करनी सुनकर राजाओं की रानियों के गर्भ गिर जाते हैं, फिर भी फरसा रहते यह शत्रु राजकुमार जीवित दिख रहा है।
अति बिनीत मृदु सीतल बानी । बोले राम जोरि जुग पानी ॥
सुनहु नाथ तुम्ह सहज सुजाना । बालक बचन करिय नहिँ काना ॥
ati binīta mṛdu sītala bānī | bole rāma jori juga pānī ||
sunahu nātha tumha sahaja sujānā | bālaka bacana kariya nahim̐ kānā ||
बररै बालक एक सुभाऊ । इन्हहिँ न बिदुष बिदूषहिँ काऊ ॥
तेहिं नाहीं कछु काज बिगारा । अपराधी मैं नाथ तुम्हारा ॥
bararai bālaka eka subhāū | inhahim̐ na biduṣa bidūṣahim̐ kāū ||
tehiṃ nāhīṃ kachu kāja bigārā | aparādhī maiṃ nātha tumhārā ||
कृपा कोप बध बन्ध गोसाँई । मो पर करिय दास की नाँई ॥
कहिय बेगि जेहि बिधि रिस जाई । मुनि-नायक सोइ करउँ उपाई ॥
kṛpā kopa badha bandha gosām̐ī | mo para kariya dāsa kī nām̐ī ||
kahiya begi jehi bidhi risa jāī | muni-nāyaka soi karaum̐ upāī ||
कह मुनि राम जाइ रिस कैसें । अजहुँ अनुज तव चितव अनैसें ॥
एहि के कंठ कुठार न दीन्हा । तो मैं काह कोप करि कीन्हा ॥
kaha muni rāma jāi risa kaiseṃ | ajahum̐ anuja tava citava anaiseṃ ||
ehi ke kaṃṭha kuṭhāra na dīnhā | to maiṃ kāha kopa kari kīnhā ||
गर्भ स्त्रवहिं अवनिप-रवनि, सुनि कुठार-गति-घोर ।
परसु अछत देखउँ जियत, बैरी भूप किसोर ॥
garbha stravahiṃ avanipa-ravani, suni kuṭhāra-gati-ghora |
parasu achata dekhaum̐ jiyata, bairī bhūpa kisora ||
पाठ का स्रोत: Wikisource · Public domain (Tulsidas, 16th c.; 1925 edition, Wikisource PD-1996 tag); transcription CC BY-SA 4.0